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राजस्थान: वर्षा जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती पर तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण हुई आयोजित

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राजस्थान  Published by: Pappu Lal Sharma , राजस्थान  Edited By: Kunal, Date: 30/05/2026 03:38:45 pm Share:
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  • Published by.: Pappu Lal Sharma ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 30/05/2026 03:38:45 pm
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संक्षेप

 राजस्थान: भीलवाड़ा कृषि विज्ञान केन्द्र, भीलवाड़ा पर जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग द्वारा प्रायोजित तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

विस्तार

 राजस्थान: भीलवाड़ा कृषि विज्ञान केन्द्र, भीलवाड़ा पर जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग द्वारा प्रायोजित तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का विषय “वर्षा जल संरक्षण तकनीकी” रखा गया, जिसमें किसानों को जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कृषि विश्वविद्यालय कोटा की कुलगुरू डॉ. विमला डूंकवाल ने किसानों से स्थानीय वस्तुओं के उपयोग और आदान-प्रदान के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने किसानों को गुणवत्तापूर्ण खेती के लिए जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने तथा रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की आवश्यकता बताई। डॉ. डूंकवाल ने श्रीअन्न एवं सहजन के औषधीय गुणों पर भी विस्तार से जानकारी दी।

महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलगुरू डॉ. प्रताप सिंह ने वर्षा जल संग्रहण एवं संचयन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को वर्षा जल के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने जल संरक्षण के लिए फार्म पॉण्ड निर्माण एवं पुराने जल स्रोतों के जीर्णोद्धार पर जोर दिया। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी. एम. यादव ने केन्द्र की गतिविधियों की जानकारी देते हुए किसानों से व्यावसायिक खेती अपनाने और केन्द्र से निरंतर संपर्क में रहने का आग्रह किया। अधीक्षण अभियंता रामराज मीणा ने सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनाकर जल बचत करने की सलाह दी।

कार्यक्रम में स्वरूपगंज के सरपंच प्यारे लाल शर्मा ने कृषि में जैव उर्वरकों के उपयोग पर बल दिया। वहीं प्रगतिशील कृषक नरेन्द्र कोहला एवं रामसिंह राणावत ने पीले तरबूज एवं बेबीकॉर्न की खेती से अधिक आय प्राप्त करने के अनुभव साझा किए। प्रशिक्षण में सुवाणा पंचायत समिति के 30 कृषक एवं महिला किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में किसानों को कृषि कैलेंडर एवं सहजन की पौध वितरित की गई।