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उत्तर प्रदेश: रोजा-नमाज के साथ जकात और फितरा की अदायगी भी बेहद जरूरी
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: माह- ए- रमजान का 22वां रोजा समाप्त हो गया. आज यानी शनिवार को 23वां रोजा है. रमजान के महीने में रोजा- नमाज व कुरान पढ़ने के साथ जकात और फितरा की अदायगी भी बेहद जरूरी है. जकात इस्लाम के पांच
विस्तार
उत्तर प्रदेश: माह- ए- रमजान का 22वां रोजा समाप्त हो गया. आज यानी शनिवार को 23वां रोजा है. रमजान के महीने में रोजा- नमाज व कुरान पढ़ने के साथ जकात और फितरा की अदायगी भी बेहद जरूरी है. जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है. रमजान के महीने में ईद की नमाज से पहले फितरा और जकात देना हर हैसियत मंद साहब ए निसाब मुसलमान का फर्ज होता है. जिस मुसलमान के पास इतना पैसा या संपत्ति है कि उसके खर्च पूरे हो रहे हैं और वह किसी की मदद करने की स्थिति में है तो वह जकात देने के लायक बन जाता है. मुस्लिम समुदाय के धर्म गुरुओं ने बताया कि हर हैसियत मंद साहब ए निसाब मुसलमान का जकात देना जरूरी होता है. आमदनी से पूरे साल में जो बचत होती है उसका 2.5 फ़ीसदी हिस्सा किसी गरीब व जरूरतमंद को देना जकात कहलाता है. महिलाओं या पुरुषों के पास अगर जेवर के रूप में भी कोई संपत्ति है तो उसकी कीमत के हिसाब से भी जकात दी जाती है. अगर परिवार में पांच सदस्य हैं और वह सभी नौकरी या किसी भी जरिये से पैसा कमाते हैं, तो परिवार के सभी सदस्यों पर जकात देना फर्ज माना जाता है. जकात की रकम गरीब, विधवा,बेसहारा महिला सगे रिश्तेदार जो जकात के हकदार को दे सकते हैं. जकात की रकम देने के लिए सबसे पहले अपने घर, खानदान में जो जकात के मुस्ताहिक हैं तलाश करें. सबसे पहला हक इनका है. फिर रिश्तेदारों व पड़ोस में तलाश करें. इसके बाद मिसकीन, यतीम, गरीब, विधवा, दिव्यांग बेसहारा को जकात दिया जा सकता है. उलेमाओं का कहना है कि फितरा वह रकम होती है जो खाते- पीते, साधन संपन्न घराने के लोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को देते हैं. ईद की नमाज से पहले इसको अदा करना जरूरी होता है. इस तरह अ मीर के साथ भी गरीब की भी ईद की त्यौहार मन जाती है. फितरे की रकम भी गरीबों, बेवाओं व यतीमों और सभी जरूरतमंदों को दी जाती है. फितरा हर बालिक, नाबालिग औरत, मर्द,बुजुर्ग मुसलमान पर वाजिब है. सदका ए फितर की रकम गरीबों में बांटना चाहिए।