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Parliament Session Uproar News: संसद में हंगामे पर सख्त चेतावनी, वेल में आने पर होगी कार्रवाई: सभापति

- Photo by : NCR SAMACHAR

दिल्ली  Published by: Kunal Tewatia , दिल्ली  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 05/08/2026 05:23:09 pm Share:
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  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
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  • 05/08/2026 05:23:09 pm
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संक्षेप

दिल्ली: राज्यसभा में लगातार हो रहे हंगामे और सदन की कार्यवाही में बाधा को लेकर सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कड़ा रुख अपनाया है।

विस्तार

दिल्ली: राज्यसभा में लगातार हो रहे हंगामे और सदन की कार्यवाही में बाधा को लेकर सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई सदस्य सदन की वेल में आता है या प्लेकार्ड दिखाकर विरोध प्रदर्शन करता है तो उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। सभापति ने सभी सदस्यों से संसदीय परंपराओं और मर्यादा का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के कई तरीके हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है।

वेल में आने और प्लेकार्ड दिखाने पर जताई नाराजगी

सभापति ने कहा कि राज्यसभा की कार्यवाही को व्यवस्थित और सुचारु रूप से चलाना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बार-बार वेल में आकर नारेबाजी करना और प्लेकार्ड लहराना सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है। ऐसे व्यवहार से महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित होते हैं और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा भी बाधित होती है।

नियमों के तहत होगी कार्रवाई

सी.पी. राधाकृष्णन ने साफ किया कि यदि भविष्य में कोई सदस्य सदन के नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ संसदीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपनी बात रखने के लिए निर्धारित संसदीय प्रक्रियाओं का पालन करें और सदन की गरिमा बनाए रखें।

विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जारी है टकराव

संसद के मौजूदा सत्र में विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है। कई मौकों पर विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी, वेल में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन और प्लेकार्ड दिखाकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई, जिसके कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और स्थगित करनी पड़ी।

शांतिपूर्ण चर्चा पर दिया जोर

सभापति ने कहा कि संसद लोकतांत्रिक बहस और विचार-विमर्श का सर्वोच्च मंच है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे जनहित के मुद्दों पर शांतिपूर्ण और सार्थक चर्चा करें, ताकि विधायी कार्य समय पर पूरे हो सकें और संसद की गरिमा बनी रहे।