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छत्तीसगढ़: जलवायु संकट में भारत पर बढ़ता खतरा, समाधान के लिए जरूरी सामूहिक प्रयास
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संक्षेप
छत्तीसगढ़: जलवायु संकट (Climate Crisis) वर्तमान समय की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती है, जो पृथ्वी के बढ़ते तापमान और मौसम के बदलते मिजाज के कारण मानव जीवन, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन गई है।
विस्तार
छत्तीसगढ़: जलवायु संकट (Climate Crisis) वर्तमान समय की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती है, जो पृथ्वी के बढ़ते तापमान और मौसम के बदलते मिजाज के कारण मानव जीवन, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन गई है। चरम मौसमी घटनाएँ लू (Heatwaves), अत्यधिक बाढ़, चक्रवात और सूखे जैसी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में भारी वृद्धि हुई है। ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2026 के अनुसार भारत दुनिया के शीर्ष 10 सबसे प्रभावित देशों में 9वें स्थान पर है। अनुमान है कि 2030 से 2050 के बीच जलवायु परिवर्तन के कारण प्रति वर्ष लगभग 2.5 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति की मृत्यु जलवायु से जुड़े कारणों से हो रही है। बदलती जलवायु के कारण गेहूं और धान जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार में 15-25% की गिरावट की आशंका है। इसके साथ ही, ग्लेशियरों के पिघलने से भविष्य में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। कोयला, तेल और गैस जलाने से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन, पेड़ों के कटने से कार्बन सोखने की क्षमता में कमी। औद्योगिक धुआँ और गहन कृषि/पशुपालन।
1. भारत ने जलवायु संकट से निपटने के लिए कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखे हैं।
2. अक्षय ऊर्जा अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करना।
3. कार्बन उत्सर्जन कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में एक अरब टन की कमी लाना।
4. गैर-जीवाश्म क्षमता 500 GW की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता तक पहुँचना।
5. कार्बन तीव्रता अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता को 45% तक कम करना।
6. व्यक्तिगत स्तर पर हम ऊर्जा बचाकर, पेड़ लगाकर और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करके योगदान दे सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन पोर्टल देख सकते हैं।
