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झारखंड: भारत माला रोड परियोजना में मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार और निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

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झारखंड  Published by: Dolly Kumari , झारखंड  Edited By: Yashoda, Date: 17/06/2026 01:54:47 pm Share:
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  • Edited By.: Yashoda,
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  • 17/06/2026 01:54:47 pm
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संक्षेप

झारखंड: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की महत्वाकांक्षी भारतमाला रोड परियोजना में कार्यरत मीरा कंस्ट्रक्शन कंपनी पर स्थानीय मजदूरों के शोषण और निर्माण कार्यों में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

विस्तार

झारखंड: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की महत्वाकांक्षी भारतमाला रोड परियोजना में कार्यरत मीरा कंस्ट्रक्शन कंपनी पर स्थानीय मजदूरों के शोषण और निर्माण कार्यों में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों और मजदूरों का आरोप है कि कंपनी के साइट इंचार्ज द्वारा दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिकों से भीषण गर्मी और हीट वेव के दौरान बिना पर्याप्त सुविधाओं के काम कराया जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें कथित तौर पर लगभग 350 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी दी जाती है, जबकि चिलचिलाती धूप में काम करने के दौरान साइट पर मौजूद अधिकारी और वर्क इंचार्ज छाते का सहारा लेकर खड़े रहते हैं। आरोप है कि मजदूरों के लिए छाया, पानी और अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जा रही है।

इसके अलावा मीरा कंस्ट्रक्शन कंपनी पर निर्माण सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कंपनी द्वारा अवैध बालू, पत्थर और मिट्टी का उपयोग निर्माण कार्यों में किया जा रहा है तथा सड़क निर्माण में सीमेंट-कंक्रीट की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुपालन को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय आरोपों के अनुसार, कंपनी द्वारा अनुमानित एस्टीमेट और बिल की मात्रा के अनुरूप कार्य नहीं कराया जा रहा है। वहीं, निर्माण कार्यों की निगरानी करने वाले संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि दामोदर नदी के गंधौनिया घाट क्षेत्र से बड़े पैमाने पर बालू उठाकर कंपनी के कैंप में स्टॉक किया गया था। उनका दावा है कि जिस समय यह गतिविधियां हुईं, उस दौरान क्षेत्र में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई थी। इस मामले में रामगढ़ और बोकारो जिले के खनन विभाग, जिला प्रशासन, अंचल और पुलिस प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर खनन और निर्माण सामग्री का उपयोग हुआ तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को कैसे नहीं हुई, यह जांच का विषय है।

भारत सरकार की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल भारतमाला रोड प्रोजेक्ट में यदि निर्माण गुणवत्ता, मजदूरों के अधिकार और नियमों के उल्लंघन जैसी शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह परियोजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर सकती हैं। इस संबंध में संबंधित कंपनी और अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।


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