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उत्तर प्रदेश: पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद की शान में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में AIMM ने एसएसपी बरेली को सौंपा ज्ञापन
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस पार्टी (AIMM) ने नाजिया इलाही खान द्वारा पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरेली को
विस्तार
उत्तर प्रदेश: ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस पार्टी (AIMM) ने नाजिया इलाही खान द्वारा पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरेली को ज्ञापन सौंपकर तत्काल एफआईआर दर्ज करने एवं कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। धार्मिक भावनाओं का सम्मान जरूरी: एडवोकेट वसी अहमद ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट वसी अहमद ने कहा कि भारत सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करने वाला देश है। किसी भी धर्म के महापुरुषों अथवा धार्मिक व्यक्तित्वों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करना सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। कानून के अनुसार हो तत्काल कार्रवाई: मुख्तार अहमद प्रदेश संगठन मंत्री मुख्तार अहमद ने कहा कि नाजिया इलाही खान द्वारा की गई टिप्पणी से मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी कृत्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रकरण में तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ज्ञापन देने वालों में राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट वसी अहमद, प्रदेश संगठन मंत्री मुख्तार अहमद, जिला अध्यक्ष अतीक करम इदरीसी, विधानसभा फरीदपुर प्रत्याशी दीपेश भारती, मंडल प्रवक्ता एवं जिला महासचिव एडवोकेट अकील उद्दीन सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
ज्ञापन पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री मुख्तार अहमद की ओर से सौंपा गया। पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी धर्म के पूजनीय व्यक्तित्वों के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग समाज में तनाव एवं अशांति पैदा कर सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
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