Contact for Advertisement 9650503773


उत्तर प्रदेश: रुधौली एथेनॉल प्लांट पर कंपनी की सफाई, अफवाहों का किया खंडन

- Photo by : social media

उत्तर प्रदेश  Published by: Irshad ahmad , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 08/07/2026 05:49:34 pm Share:
  • उत्तर प्रदेश
  • Published by.: Irshad ahmad ,
  • Edited By.: Kunal,
  • Date:
  • 08/07/2026 05:49:34 pm
Share:

संक्षेप

उत्तर प्रदेश: रुधौली क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर चल रहे विरोध और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही विभिन्न जानकारियों के बीच अनीता डिस्टलरी प्रा. लि. ने प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष सार्वजनिक किया है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: रुधौली क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर चल रहे विरोध और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही विभिन्न जानकारियों के बीच अनीता डिस्टलरी प्रा. लि. ने प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। कंपनी ने 'जनहित सूचना एवं तथ्य पत्रक' जारी करते हुए परियोजना से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर स्पष्टीकरण दिया और लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक जानकारी पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक तथ्यों की जांच अवश्य करें। कंपनी के अनुसार वर्ष 2021 से परियोजना के लिए खरीदी गई सभी भूमि अनीता डिस्टलरी प्रा. लि. के नाम पर ही पंजीकृत की गई है। कंपनी का कहना है कि 'डिस्टलरी' नाम से ही स्पष्ट था कि यहां एथेनॉल उत्पादन इकाई स्थापित की जानी है तथा भूमि खरीद की पूरी प्रक्रिया संबंधित भू-स्वामियों की सहमति और कानूनी प्रक्रिया के तहत पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। कंपनी ने यह भी बताया कि परियोजना की सार्वजनिक सुनवाई 20 फरवरी 2025 को तत्कालीन मुख्य राजस्व अधिकारी और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित की गई थी। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 30 दिन पूर्व प्रमुख समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित की गई थी तथा सुनवाई में स्थानीय किसानों, महिलाओं और ग्रामीणों ने भी भाग लिया था।

कंपनी ने पर्यावरण और जल उपयोग को लेकर उठ रही आशंकाओं पर भी सफाई देते हुए कहा कि प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट अत्याधुनिक जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक पर आधारित होगा, जिसके तहत फैक्ट्री से कोई भी दूषित जल बाहर नहीं छोड़ा जाएगा। उपयोग किए गए पानी का शोधन कर उसे पुनः उत्पादन प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी का दावा है कि परियोजना का निर्माण पर्यावरण मंत्रालय और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित उस दावे को भी कंपनी ने भ्रामक बताया, जिसमें एक लीटर एथेनॉल उत्पादन के लिए 10 हजार लीटर पानी की आवश्यकता बताई गई थी। कंपनी के अनुसार आधुनिक एथेनॉल संयंत्र न्यूनतम जल उपयोग और जल पुनर्चक्रण तकनीक पर आधारित होते हैं। प्रेस नोट में कहा गया है कि एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से सरप्लस अनाज और मक्का से किया जाएगा, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। कंपनी ने बताया कि परियोजना का लगभग 75 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इसके संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से करीब 200 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। कंपनी ने विश्वास जताया कि यह परियोजना स्थानीय रोजगार, किसानों की आय में वृद्धि और बस्ती के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।