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उत्तर प्रदेश: कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू, 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि पर होगा जलाभिषेक
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सनातन धर्म में कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति आस्था, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है. हर वर्ष सावन माह के आगमन के साथ लाखों शिवभक्त गंगा तटों की ओर प्रस्थान करते है और पवित्र गंगाजल लेकर अपने आराध्य महादेव का जलाभिषेक करते हैं
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सनातन धर्म में कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति आस्था, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है. हर वर्ष सावन माह के आगमन के साथ लाखों शिवभक्त गंगा तटों की ओर प्रस्थान करते है और पवित्र गंगाजल लेकर अपने आराध्य महादेव का जलाभिषेक करते हैं. इस दौरान पूरा वातावरण बोल बम और हर- हर महादेव के जयघोष से भक्ति मय हो उठता है. कांवड़ यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि संयम, तपस्या और भक्ति का भी पर्व है, जिसमें श्रद्धालु कठिन यात्रा पूरी कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. वर्ष 2026 में भी सावन के साथ इस पावन यात्रा की शुरुआत 30 जुलाई से होगी, जिसमें देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे. सावन माह की शुरुआत के साथ ही 30 जुलाई 2026 से कांवड़ यात्रा आरंभ हो जाएगी. इस दौरान लाखों से शिव भक्त पवित्र गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों की ओर प्रस्थान करेंगे. सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी, जिसे कांवड़ यात्रा करने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. इसी अवसर पर श्रद्धालु भगवान शिव को गंगाजल से अभिषेक करेंगे और सुख- समृद्धि तथा मंगलमय जीवन की कामना करेंगे. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल अर्पित करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। कावड़ यात्रा को श्रद्धालु अपनी क्षमता और संकल्प के अनुसार अलग-अलग तरीकों से पूरा करते हैं. सामान्य कावड़ यात्रा में भक्त विश्राम करते हुए गंगाजल लेकर शिव मंदिर तक पहुंचाते हैं. वहीं खड़ी कावड़ यात्रा में कांवड़ को पूरे मार्ग में जमीन पर रखने की अनुमति नहीं होती, इसलिए इस समूह में पूरा किया जाता है. दांडी कावड़ यात्रा सबसे कठिन मानी जाती है, जिसमें श्रद्धालु दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ते हैं. इसके अलावा डाक कांवड़ यात्रा भी काफी लोकप्रिय है, जिसमें भक्त बिना रुके तेज गति से गंतव्य तक पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं. कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अनुशासन और तपस्या का प्रतीक है. यात्रा पर निकलने से पहले श्रद्धालु सात्विक जीवन शैली अपनाते हैं और मांसाहार सहित सभी तामसिक पदार्थों का त्याग करते हैं. यात्रा के दौरान मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखना आवश्यक माना गया है. शिवभक्त पूरी श्रद्धा, संयम और सकारात्मक सोच के साथ यह यात्रा पूर्ण करते हैं, जिससे भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है. साल 2026 में सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी. यह 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा के साथ समाप्त हो जाएगा. पहला सावन सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त तथा चौथा सावन सोमवार 24 अगस्त को होगी।
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