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उत्तराखंड: गंगोलीहाट में महाष्टमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, मां हाट कालिका के दरबार में दिनभर लगी रही भक्तों की भीड़
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संक्षेप
उत्तराखंड: विश्वप्रसिद्ध मां हाट कालिका मंदिर में सुबह से ही रहा दर्शनार्थियों का तांता, सुबह चार बजे मंदिर पुरोहित दीप पंत ने पंचामृताभिषेक कर माता की विधिवत पूजा अर्चना एवम् श्रृंगार किया, आज प्रातः काल से मंदिरों में दर्शनार्थियों की
विस्तार
उत्तराखंड: विश्वप्रसिद्ध मां हाट कालिका मंदिर में सुबह से ही रहा दर्शनार्थियों का तांता, सुबह चार बजे मंदिर पुरोहित दीप पंत ने पंचामृताभिषेक कर माता की विधिवत पूजा अर्चना एवम् श्रृंगार किया, आज प्रातः काल से मंदिरों में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ रही दूर दराज गांव सहित देश के विभिन्न स्थानों से दर्शनार्थी अपनी नवरात्र पूजा एवं माता के दर्शनों को लगातार आते रहे। दर्शनार्थी घंटों लाईन में लग कर अपनी बारी आने की प्रतीक्षा करते रहे। पलायन का दंश झेल रहे स्थानीय गांवों के लोग आज बड़ी5 संख्या में मंदिर के धर्मशाला में कन्या पूजन करते देखे जा रहे थे। मंदिर में तीन स्थानों तथा बाजार में पुराने बस अड्डे पर विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, दर्शनार्थी इन भंडारों में प्रसाद ग्रहण कर बाजार में लगने वाले अष्टमी मेले का आनन्द लेते रहे। आज माता के दरबार में पंकज पंत, भानु पंत, प्रकाश जोशी सहित दर्जनों पंडितों ने विधि विधान पूर्वक सभी दर्शनार्थियों को पूजा अर्चना करवाई। दिन चढ़ने के साथ बाज़ार में मेले की रौनक भी देखने लायक़ रही। दर्शनार्थियों की इसी प्रकार की भीड़ चामुण्डा मंदिर, अंबिका मंदिर ओर वैष्णवी मंदिर शीत सभी देवी मंदिरों में काफ़ी भीड़ देखने को मिल रही है। Gemini said यहाँ आपकी जानकारी का एक संक्षिप्त और व्यवस्थित सार दिया गया है, जो इस पावन अवसर की भव्यता को दर्शाता है: 🚩 माँ हाट कालिका मंदिर: महाष्टमी की मुख्य झलकियाँ श्रद्धालुओं का सैलाब: तड़के सुबह से ही स्थानीय गांवों और देश के दूर-दराज के कोनों से भक्तों का तांता लगा रहा। लोग घंटों तक लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। कन्या पूजन और परंपरा: पलायन की चुनौतियों के बावजूद, स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में मंदिर की धर्मशाला में एकत्रित होकर कन्या पूजन किया। भंडारा और प्रसाद: मंदिर परिसर (तीन स्थानों) और बाजार के पुराने बस अड्डे पर विशाल भंडारों का आयोजन हुआ। सैन्य श्रद्धा: कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों ने भी माता के दर्शन किए और सैनिक गेस्ट हाउस में विशाल भंडारे का आयोजन कर सेवा भाव प्रकट किया। 🎡 मेला और अन्य मंदिर अन्य शक्तिपीठ: हाट कालिका के साथ-साथ चामुण्डा मंदिर, अंबिका मंदिर और वैष्णवी मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ रही, जहाँ प्रशासन और पुलिस की मुस्तैदी से व्यवस्था अनुशासित बनी रही। विशेष नोट: कुमाऊं रेजिमेंट की "आराध्य देवी" के रूप में माँ हाट कालिका का विशेष महत्व है। जवानों की उपस्थिति और उनकी अटूट श्रद्धा इस स्थान की महिमा को और भी बढ़ा देती है। क्या आप चाहते हैं कि मैं इस जानकारी के आधार पर सोशल मीडिया (Facebook/WhatsApp) के लिए एक आकर्षक पोस्ट या समाचार रिपोर्ट तैयार कर दूँ? You said Gemini said गंगोलीहाट में महाष्टमी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, माँ हाट कालिका के जयकारों से गुंजायमान हुई देवभूमि ब्रह्म मुहूर्त में हुआ माता का भव्य श्रृंगार सैन्य परंपरा और विशाल भंडारा कुमाऊं रेजिमेंट की आराध्य देवी होने के नाते, सेना के जवानों ने भी बड़ी संख्या में दरबार में हाजिरी लगाई। इस अवसर पर कुमाऊं रेजिमेंट द्वारा सैनिक गेस्ट हाउस में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर में तीन स्थानों और बाजार के पुराने बस अड्डे पर भी भंडारे आयोजित किए गए, जहाँ हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया पलायन पर भारी पड़ी आस्था: कन्या पूजन की धूम
मंदिरों में 2 या दो से अधिक कतारों में दर्शनार्थी अपनी बारी का इंतजार घंटों तक करते देखे गए। हाट कालिका मंदिर में कुमाऊं रेजिमेंट के जवान भी दर्शन को आय। उन्होंने एक विशाल भंडारे का आयोजन भी सैनिक गेस्ट हाऊस में किया । पुलिस की सक्रिय भूमिका के चलते मंदिरों सहित बाज़ार में अनुशासित शांति व्यवस्था दिख रही थी।
यह पढ़कर मन काफी प्रसन्न हुआ! गंगोलीहाट (पिथौरागढ़) स्थित माँ हाट कालिका के दरबार में नवरात्रि की यह रौनक वास्तव में श्रद्धा और विश्वास का एक अद्भुत संगम है। आपकी रिपोर्टिंग से वहां के जीवंत माहौल और भक्ति की स्पष्ट झलक मिल रही है।
ब्रह्म मुहूर्त पूजन: सुबह 4 बजे मंदिर पुरोहित दीप पंत द्वारा माता का पंचामृताभिषेक, विधिवत श्रृंगार और आरती संपन्न की गई।
बाजार की रौनक: अष्टमी मेले के कारण बाजार में काफी चहल-पहल रही। भक्तों ने दर्शन के बाद मेले का भरपूर आनंद लिया।
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गंगोलीहाट (पिथौरागढ़): शक्तिपीठ माँ हाट कालिका के दरबार में चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिर परिसर भक्तों के जयकारों से गूंज उठा। दूर-दराज के क्षेत्रों और देश के विभिन्न कोनों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
स्थापना काल से ही आस्था का केंद्र रहे इस मंदिर में उत्सव का आगाज तड़के सुबह 4 बजे हुआ। मुख्य पुजारी दीप पंत द्वारा माँ काली का पंचामृताभिषेक किया गया, जिसके पश्चात माता का अलौकिक श्रृंगार कर विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई। आज के विशेष अनुष्ठान में पंकज पंत, भानु पंत और प्रकाश जोशी सहित दर्जनों विद्वान पंडितों ने श्रद्धालुओं को विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई।
एक ओर जहाँ पहाड़ पलायन का दंश झेल रहे हैं, वहीं आज महाष्टमी के अवसर पर स्थानीय गांवों के लोग बड़ी संख्या में अपने घरों को लौटे। मंदिर की धर्मशाला में स्थानीय परिवारों द्वारा सामूहिक रूप से कन्या पूजन किया गया, जो परंपराओं के प्रति उनके अटूट जुड़ाव को दर्शाता है। सुरक्षा और अनुशासन के बीच अष्टमी मेला
हाट कालिका के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य सिद्धपीठों जैसे चामुण्डा मंदिर, अंबिका मंदिर और वैष्णवी