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छत्तीसगढ़: जल संकट की असली वजह: इंसान खुद अपनी प्यास का जिम्मेदार
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संक्षेप
छत्तीसगढ़: विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों ने बताया प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति 1,700 क्यूबिक मीटर पानी की उपलब्धता को जल-तनाव सीमा कहते हैं, इस सीमा के नीचे पानी की किल्लत शुरू हो जाती है। और प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति
विस्तार
छत्तीसगढ़: विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों ने बताया प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति 1,700 क्यूबिक मीटर पानी की उपलब्धता को जल-तनाव सीमा कहते हैं, इस सीमा के नीचे पानी की किल्लत शुरू हो जाती है। और प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति 1,000 क्यूबिक मीटर पानी की उपलब्धता को जल-संकट सीमा कहते हैं, इस सीमा के नीचे हर व्यक्ति के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलता, अकेले कृषि क्षेत्र में 2030 तक माँग-आपूर्ति का अंतर 570 लाख करोड़ लीटर तक हो सकता है। जिसका सीधा परिणाम खाद्य पदार्थों की कमी व आसमान छूती महँगाई की तरह दिखेगा। 2050 तक कृषि उत्पादकता में 50% की गिरावट आ सकती है!
ऐसे में पानी के लिए गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनने लगती है! और जानते हैं इस वक्त भारत में पानी की क्या स्थिति है? 2025 में भारत में पानी की उपलब्धता 1,100 क्यूबिक मीटर तक गिर चुकी है। 2031 तक भारतीयों की पानी की माँग उपलब्ध जल संसाधनों के दो गुनी होने वाली है। 2050 तक जलसंकट का सामना करने वाले क्षेत्रों की संख्या तीन गुना होने वाली है।
जलसंकट के कारण 2050 तक भारत की जीडीपी में 6% की कमी आ सकती है!
जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत 122 देशों में से 120वें स्थान पर है, भारत में लगभग 70% जल प्रदूषित है। भारतीयों में 21% संक्रामक रोग असुरक्षित पानी से जुड़े होते हैं!
इस तेज़ी से बढ़ते जलसंकट का कारण? क्लाइमेट चेंज बढ़ती जनसंख्या
उपभोक्तावाद और भूलिएगा मत! पहले कारण के पीछे भी दूसरा और तीसरा कारण ही है।
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