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मध्य प्रदेश: न संबल का पैसा, न आयुष्मान से इलाज; कागजों पर ‘नंबर वन’ बनने के लिए जनता से धोखाधड़ी
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: भाजपा सरकार के दावों की खुली पोल: न मिल रहा संबल का पैसा, न आयुष्मान से इलाज; कागजों पर 'नंबर वन' बनने के लिए जनता से धोखाधड़ी
देवास (टोंक खुर्द) मध्य प्रदेश की
विस्तार
मध्य प्रदेश: भाजपा सरकार के दावों की खुली पोल: न मिल रहा संबल का पैसा, न आयुष्मान से इलाज; कागजों पर 'नंबर वन' बनने के लिए जनता से धोखाधड़ी और निराकरण हो चुका है सच्चाई यह है कि पीड़ित राहुल नवरंग आज भी खाली हाथ दफ्तरों की सीढ़ियाँ चढ़ने को मजबूर हैं, उम्र का बहाना: वोट के समय क्यों नहीं दिखी पिता की उम्र? अब अधिकारी नया पैंतरा चलते हुए यह कह रहे हैं कि 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों को संबल योजना का लाभ नहीं मिलता। राहुल नवरंग का सीधा सवाल भाजपा सरकार से है— "जब मेरे पिता बाबू सिंह मालवीय नवरंग का संबल कार्ड बनाया गया था, तब क्या सिस्टम को उनकी उम्र नहीं दिखी अगर लाभ नहीं देना था, तो कार्ड बनाया ही क्यों जब चुनाव में वोट लेने की बारी आती है, तब भाजपा सरकार को बुजुर्गों की उम्र नहीं दिखती, लेकिन सहायता देते समय नियमों का हवाला देकर उन्हें अपात्र बता दिया जाता है। आयुष्मान कार्ड: भाजपा सरकार का मुफ्त इलाज का वादा सिर्फ छलावा यही हाल आयुष्मान कार्ड का है। भाजपा सरकार दावा करती है कि 5 लाख तक का इलाज मुफ्त है, लेकिन जब गरीब मरीज अस्पताल पहुँचता है, तो उसे 'सर्वर डाउन' या 'योजना बंद है' जैसे बहाने बताकर वापस भेज दिया जाता है आयुष्मान कार्ड जेब में होने के बावजूद गरीबों को अपनी जमीन-जेवर बेचकर इलाज कराना पड़ रहा है। पोर्टल चमकाने में जुटे अधिकारी, सड़कों पर परेशान जनता प्रशासनिक अधिकारियों को जनता की तकलीफों से कोई लेना-देना नहीं है। उनका एकमात्र मकसद सीएम हेल्पलाइन के पोर्टल पर शिकायतों को बंद (Close) करना है ताकि भाजपा सरकार के रिकॉर्ड में सब 'ऑल इज वेल' दिखे। टोंक खुर्द नगर परिषद में जिस तरह बिना फॉर्म लिए पोर्टल पर 'सफलता' की कहानी लिखी गई, वह इस भ्रष्ट सिस्टम का सबसे बड़ा सबूत है। प्रदेश में अफसरशाही इस कदर हावी है कि राहुल नवरंग जैसे पीड़ितों की सुनवाई केवल कागजों तक सीमित है। यदि जल्द ही इन योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता को नहीं मिला और फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों पर गाज नहीं गिरी, तो जनता आगामी चुनावों में भाजपा सरकार को इसका करारा जवाब देगी।
देवास (टोंक खुर्द) मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार की संबल और आयुष्मान जैसी जनहितैषी योजनाएं अब केवल विज्ञापनों और होर्डिंग्स तक सीमित रह गई हैं। धरातल पर सच्चाई यह है कि गरीब जनता के पास कार्ड तो हैं, लेकिन इन कार्डों की हैसियत रद्दी के टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं रह गई है। देवास जिले के टोंक खुर्द से सामने आए ताजा मामले ने साफ कर दिया है कि कैसे सरकारी अधिकारी सीएम हेल्पलाइन पर झूठी रिपोर्ट लगाकर भाजपा सरकार की छवि और जनता दोनों को बेवकूफ बना रहे हैं
संबल कार्ड: पिता की मृत्यु के बाद भी राहुल नवरंग को नहीं मिल रहा हक
नगर परिषद टोंक खुर्द के मालवीय नगर निवासी राहुल नवरंग, अपने पिता स्व. बाबू सिंह मालवीय नवरंग की मृत्यु के बाद मिलने वाली 'संबल योजना' की अनुग्रह सहायता राशि के लिए महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। भाजपा सरकार के सुशासन के दावों के उलट, यहाँ अधिकारी पीड़ित का फॉर्म तक लेने को तैयार नहीं हैं हद तो तब हो गई जब सीएम हेल्पलाइन (शिकायत क्र. 3646840) पर अधिकारियों ने बेशर्मी से सफेद झूठ लिख दिया कि "राहुल का फॉर्म जमा हो गया है
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