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मध्य प्रदेश: भगवान श्रीराम के आदर्शों से स्थापित हुआ रामराज्य, श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 01/06/2026 03:12:07 pm Share:
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: पोरसा क्षेत्र के ग्राम धोर्रा स्थित पाडरी वाले बाबा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा के पावन अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर श्री रामभूषण दास जी महाराज खनेता सरकार

विस्तार

मध्य प्रदेश: पोरसा क्षेत्र के ग्राम धोर्रा स्थित पाडरी वाले बाबा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा के पावन अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर श्री रामभूषण दास जी महाराज खनेता सरकार ने भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने इस धरती पर मर्यादा, धर्म और न्याय की स्थापना के लिए अवतार लिया था। उन्होंने अपने आदर्श जीवन और त्यागमय आचरण से मानव समाज को सदाचार, कर्तव्य और धर्मपालन की शिक्षा दी।
महाराज श्री ने बताया कि त्रेतायुग में जब अधर्म, अत्याचार और राक्षसी प्रवृत्तियां बढ़ गई थीं, तब भगवान विष्णु ने अयोध्या के राजा दशरथ के यहां श्रीराम के रूप में अवतार लिया। भगवान राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी के दिन हुआ, जिसे आज पूरे देश में रामनवमी के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि बाल्यकाल से ही श्रीराम अत्यंत विनम्र, सरल और मर्यादित स्वभाव के थे। महर्षि विश्वामित्र के साथ जाकर उन्होंने ताड़का, मारीच और सुबाहु जैसे राक्षसों का संहार कर धर्म की रक्षा की। इसके पश्चात मिथिला में आयोजित स्वयंवर में भगवान शिव का धनुष तोड़कर माता सीता का वरण किया। कथा में महाराज श्री ने बताया कि पिता दशरथ की आज्ञा का पालन करने के लिए भगवान राम ने राजसिंहासन का त्याग कर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। वनवास के दौरान उन्होंने ऋषि-मुनियों की रक्षा की और जनकल्याण का कार्य किया। इसी अवधि में रावण द्वारा माता सीता का हरण किया गया, जिसके बाद भगवान राम ने वानर सेना के सहयोग से लंका पर चढ़ाई की।

उन्होंने कहा कि भगवान राम ने हनुमान, सुग्रीव, जामवंत और अंगद जैसे भक्तों एवं सहयोगियों के साथ मिलकर धर्म की विजय का मार्ग प्रशस्त किया। समुद्र पर रामसेतु का निर्माण कराया गया और लंका में भीषण युद्ध के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद जैसे अत्याचारी असुरों का अंत किया गया। यह विजय सत्य, धर्म और न्याय की विजय का प्रतीक बनी। महाराज श्री ने बताया कि वनवास की अवधि पूर्ण होने के बाद भगवान राम अयोध्या लौटे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके पश्चात उनका राज्याभिषेक हुआ और रामराज्य की स्थापना हुई। रामराज्य में सभी प्रजा सुखी, सुरक्षित और संतुष्ट थी। वहां किसी प्रकार का अन्याय, शोषण, भय या भेदभाव नहीं था। धर्म, न्याय, प्रेम और सद्भावना के आधार पर शासन चलता था, इसलिए आज भी आदर्श शासन व्यवस्था की तुलना रामराज्य से की जाती है।

आचार्य महामंडलेश्वर श्री रामभूषण दास जी महाराज खनेता सरकार ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान राम अत्यंत सरल और करुणामय हैं। वे सच्चे मन से की गई थोड़ी सी सेवा और पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के नाम का जप करने से मनुष्य को पुण्य लाभ प्राप्त होता है तथा पूर्व जन्म और वर्तमान जीवन के पापों का क्षय होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाता है। कथा सुनने से व्यक्ति के भीतर भक्ति, सदाचार और सकारात्मक विचारों का संचार होता है तथा भगवान की कृपा से जीवन सुखमय और खुशहाल बन जाता है।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। पूरे कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।

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