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राजस्थान: अजमेर में वर्षों पुरानी ‘नज़रे हुसैन’ लंगर परंपरा जारी, भाईचारे और इंसानियत का संदेश
- Photo by : social media
संक्षेप
राजस्थान: नज़रे हुसैन लंगर-ए-आम मिंजानिब हताई कातन बावड़ी, अंदर कोट अजमेर में वर्षों पुरानी लंगर की परंपरा आज भी अकीदत और सेवा भाव के साथ जारी है।
विस्तार
राजस्थान: नज़रे हुसैन लंगर-ए-आम मिंजानिब हताई कातन बावड़ी, अंदर कोट अजमेर में वर्षों पुरानी लंगर की परंपरा आज भी अकीदत और सेवा भाव के साथ जारी है। ऐतिहासिक हताई कातन बावड़ी क्षेत्र में आयोजित होने वाले इस लंगर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण करते हैं लंगर में विशेष रूप से दाल और तंदूरी रोटी तैयार कर लोगों को खिलाई जाती है। इस आयोजन का एहतमाम बड़ी अकीदत और मेहनत के साथ किया जाता है। खास बात यह है कि यहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग आपसी भाईचारे और मोहब्बत के साथ लंगर में शामिल होकर भोजन करते हैं। लंगर की व्यवस्था में खानसामा शकील खान और उनकी टीम महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। टीम द्वारा भोजन तैयार करने से लेकर लोगों को खिलाने तक की पूरी व्यवस्था संभाली जाती है। आयोजकों का कहना है कि लंगर का उद्देश्य जरूरतमंदों और आने वाले लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ इंसानियत, भाईचारे और आपसी मोहब्बत का संदेश देना है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी अजमेर की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सौहार्द की खूबसूरत मिसाल बनी हुई है।
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