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उत्तर प्रदेश: नोएडा सेक्टर-3 में अवैध बसों का जमावड़ा? टी-सीरीज़ के मुख्य द्वार पर कब्ज़े से उद्योग संचालन प्रभावित
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: औद्योगिक नगरी नोएडा के सेक्टर-3 स्थित टी-सीरीज़ कंपनी के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर प्रतिदिन 6 से 7 निजी बसें सड़क पर खड़ी कर दी जाती हैं। आरोप है कि इन बसों के कारण कंपनी में आने-जाने वाले कर्मचारियों
विस्तार
उत्तर प्रदेश: औद्योगिक नगरी नोएडा के सेक्टर-3 स्थित टी-सीरीज़ कंपनी के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर प्रतिदिन 6 से 7 निजी बसें सड़क पर खड़ी कर दी जाती हैं। आरोप है कि इन बसों के कारण कंपनी में आने-जाने वाले कर्मचारियों, मालवाहक वाहनों तथा अन्य आवश्यक गतिविधियों में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि कई बार बस चालकों एवं संचालकों से वाहन हटाने का अनुरोध किया गया, लेकिन वे बसें हटाने के बजाय विवाद और झगड़े पर उतारू हो गए। इससे कर्मचारियों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। मामला जब NCR समाचार के पत्रकार संजीव सिंह के संज्ञान में आया तो उन्होंने पहले स्वयं बस संचालकों से बातचीत कर समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया। जब कोई समाधान नहीं निकला तो उन्होंने डीसीपी ट्रैफिक, नोएडा को पूरे मामले से अवगत कराया। डीसीपी द्वारा संबंधित ट्रैफिक इंस्पेक्टर (TI) को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की जानकारी मिली, लेकिन कंपनी प्रबंधन का आरोप है कि अब तक मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है और बसें पहले की तरह सड़क पर खड़ी की जा रही हैं। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि यदि नोएडा जैसे औद्योगिक शहर में उद्योगों को पुलिस एवं ट्रैफिक विभाग से समय पर सहयोग नहीं मिलेगा, तो निवेशकों के बीच गलत संदेश जाएगा। एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री देश-विदेश में उत्तर प्रदेश में निवेश लाने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यदि उद्योगों को इस प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़े तो यह चिंता का विषय है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जिले की पुलिस आयुक्त द्वारा उद्योगों की सुरक्षा और सुचारु संचालन के लिए लगातार निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर उन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है तो संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कंपनी प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है मानो बस संचालकों को किसी कार्रवाई का भय नहीं है। यदि शीघ्र ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कंपनी के अधिकारी नोएडा पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर पूरे मामले की लिखित शिकायत देंगे। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डीसीपी ट्रैफिक तक मामला पहुंच चुका है, तब भी कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्या प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा, या उद्योगों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा?
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