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उत्तर प्रदेश: गोंडा से 5 KM दूर गांव बेहाल, सड़क बनी तालाब; 15 साल से एक ही प्रधान पर उठे सवाल

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उत्तर प्रदेश  Published by: Rakesh Kumar(UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 07/09/2026 03:00:37 pm Share:
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  • Published by.: Rakesh Kumar(UP) ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
  • Date:
  • 07/09/2026 03:00:37 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: गोंडा सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने और ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने के दावे कर रही है, लेकिन गोंडा जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर स्थित एक गांव की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। 

विस्तार

उत्तर प्रदेश: गोंडा सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने और ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने के दावे कर रही है, लेकिन गोंडा जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर स्थित एक गांव की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। झंझरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत भदुवा तरहर के मजरा अहिरन पुरवा में सड़क, जल निकासी और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की मुख्य सड़क लंबे समय से जर्जर हालत में है। बारिश के दौरान सड़क पर जगह-जगह पानी भर जाता है और गहरे गड्ढों के कारण रास्ता तालाब जैसा दिखाई देने लगता है। ग्रामीणों के मुताबिक, कई स्थानों पर करीब दो फीट तक गहरे गड्ढे हैं, जिससे पैदल चलने के साथ-साथ दोपहिया वाहनों से निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

नाली और जल निकासी की व्यवस्था नहीं

गांव में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने का भी आरोप है। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश होते ही घरों के सामने पानी जमा हो जाता है और कई दिनों तक जलभराव की स्थिति बनी रहती है। इससे लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है और गंदा पानी जमा रहने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव से सरकारी स्कूल और अस्पताल करीब दो किलोमीटर दूर हैं। खराब सड़क और जलभराव के कारण बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों का दावा है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस को भी गांव तक पहुंचने में दिक्कत होती है।

15 साल से एक ही प्रधान, विकास पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में लंबे समय से एक ही प्रधान के रहने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर विकास कार्यों के लिए लगातार योजनाएं और सरकारी बजट उपलब्ध कराया जा रहा है, तो गांव की सड़क और जल निकासी जैसी बुनियादी समस्याएं अब तक दूर क्यों नहीं हुईं। हालांकि, विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि और उसके खर्च का वास्तविक ब्योरा संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकता है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि गांव में हुए विकास कार्यों, स्वीकृत धनराशि और उसके खर्च की जांच कराई जाए तथा जर्जर सड़क और जलभराव की समस्या का जल्द समाधान किया जाए। गांव की स्थिति यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि जिला मुख्यालय के इतने करीब होने के बावजूद अगर ग्रामीण आज भी सड़क और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं, तो सरकार के गांवों तक विकास पहुंचाने के दावों की जमीनी हकीकत आखिर क्या है?