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झारखण्ड: मकर संक्रांति पर ISKCON लखनऊ की सेवा: 1.25 लाख श्रद्धालुओं को खिचड़ी प्रसाद
- Photo by : social media
संक्षेप
झारखण्ड: मकर संक्रांति जैसे पावन पर्व पर जब पूरा देश सूर्य उपासना और दान-पुण्य में लीन रहता है, उसी भावना को जीवंत रूप देता दिखा इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्शसनेस (ISKCON) लखनऊ।
विस्तार
झारखण्ड: मकर संक्रांति जैसे पावन पर्व पर जब पूरा देश सूर्य उपासना और दान-पुण्य में लीन रहता है, उसी भावना को जीवंत रूप देता दिखा इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्शसनेस (ISKCON) लखनऊ। शहर के प्रमुख स्थलों पर लगाए गए सेवा पंडालों के माध्यम से ISKCON ने 1.25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को खिचड़ी प्रसाद वितरित कर “कर्म को धर्म से जोड़ने” की परंपरा को सशक्त किया। ISKCON का सिद्धांत है कर्म समाज के लिए सेवा करना धर्म : उस सेवा को भगवान को समर्पित करना करुणा : हर जीव में ईश्वर को देखना यही त्रिवेणी ISKCON को एक साधारण धार्मिक संस्था से ऊपर उठाकर मानवता की पाठशाला बनाती है। हर प्राणी के लिए जीने की राह ISKCON का यह अभियान यह सिखाता है कि धर्म मंदिर में नहीं, भूखे को भोजन देने और दुखी को आशा देने में है। आज जब समाज जाति, धर्म और स्वार्थ में बंट रहा है, ISKCON लखनऊ निष्काम सेवा के माध्यम से यह संदेश दे रहा है कि सभी जीव एक ही परमात्मा की संतान हैं।
तस्वीरों में साफ दिखता है कि कैसे साधारण सा प्रसाद वितरण केवल भोजन नहीं, बल्कि करुणा, सेवा और समानता का संदेश बन गया। ISKCON के स्वयंसेवक गीता और कृष्ण-भक्ति साहित्य लोगों को भेंट कर यह समझा रहे थे कि सच्चा धर्म वही है, जो हर प्राणी के दुख को अपना दुख समझे।” कर्म, धर्म और करुणा की त्रिवेणी
दूसरी तस्वीर में एक श्रद्धालु को श्रीमद्भगवद्गीता भेंट करते हुए ISKCON के स्वयंसेवक दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य बताता है कि संस्था केवल पेट नहीं भर रही, बल्कि आत्मा को भी दिशा दे रही है।