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मध्य प्रदेश: अवैध खनन से प्रधानमंत्री सड़क निर्माण का आरोप, खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: दमोह जिले की तहसील पथरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत कारीजोग खैजरा क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।
विस्तार
मध्य प्रदेश: दमोह जिले की तहसील पथरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत कारीजोग खैजरा क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बरी मार्ग की ओर बनाई जा रही प्रधानमंत्री सड़क के निर्माण कार्य में नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध रूप से मिट्टी और मुरम की खुदाई की जा रही है। मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले लगभग पांच दिनों से लगातार जेसीबी मशीन और बॉबकैट मशीनों की मदद से बड़े स्तर पर खुदाई का कार्य किया जा रहा है। आरोप है कि यह खुदाई बिना किसी वैध अनुमति के की जा रही है और रात के समय भी काम जारी रहता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य के नाम पर आसपास की जमीन से अवैध खनन कर सामग्री निकाली जा रही है, जिससे पर्यावरण और सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि मामले की सूचना खनिज विभाग के अधिकारियों को दी गई थी। खनिज अधिकारी द्वारा कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन शिकायत के छह दिन बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से मौके पर कोई निरीक्षण या पंचनामा नहीं बनाया गया। इससे लोगों में प्रशासन की कार्यशैली को लेकर संदेह पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि जिम्मेदार अधिकारी मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं और अवैध खनन पर रोक लगाने के बजाय मौन बने हुए हैं। कुछ ग्रामीणों ने यहां तक आरोप लगाया कि कार्रवाई न होने से ऐसा प्रतीत होता है मानो अधिकारियों की मिलीभगत से यह कार्य चल रहा हो। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री सड़क जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य में यदि अवैध खनन सामग्री का उपयोग किया जाएगा तो सड़क की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े होंगे। साथ ही अनियंत्रित खुदाई से आसपास की कृषि भूमि और प्राकृतिक संतुलन को भी नुकसान पहुंच सकता है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा निर्माण कार्य में नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाई जाती है।
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