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उत्तर प्रदेश: बखिरा में विवादित जमीन पर कब्जे का आरोप, पुलिस की निष्क्रियता पर पीड़ित परिवार के सवाल

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उत्तर प्रदेश  Published by: Prvin Kumar , Date: 31/03/2026 05:37:16 pm Share:
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  • 31/03/2026 05:37:16 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: जिले के बखिरा थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां विवादित भूमि पर कथित तौर पर दबंगों द्वारा कब्जा करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि कई शिकायतों

विस्तार

उत्तर प्रदेश: जिले के बखिरा थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां विवादित भूमि पर कथित तौर पर दबंगों द्वारा कब्जा करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि कई शिकायतों और पर्याप्त साक्ष्यों के बावजूद स्थानीय पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है, जिससे क्षेत्र में चर्चा का माहौल गर्म है। बताया जा रहा है कि छपिया अव्वल (नगर पंचायत बाघनगर उर्फ बखिरा) निवासी रामशंकर व रामचंद्र पाठक पुत्र लालसा प्रसाद की भूमि को लेकर न्यायालय में विवाद चल रहा है और संबंधित जमीन पर न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) भी लागू है। इसके बावजूद आरोप है कि हृदय प्रकाश पाठक पुत्र भास्कर पाठक तथा धनेश व धनंजय पुत्रगण हृदय प्रकाश पाठक द्वारा उक्त विवादित भूमि पर जबरन साफ-सफाई कर कब्जा करने का प्रयास लगातार किया जा रहा है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (X) पर भी CCTV फुटेज सहित कई प्रमाणों के साथ शिकायत की जा चुकी है तथा संतकबीरनगर पुलिस के उच्च अधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया गया है। इसके बावजूद बखिरा पुलिस द्वारा आरोपितों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पीड़ित परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि दबंगों द्वारा परिवार की महिलाओं और बच्चियों के साथ अपशब्द और अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है तथा शौचालय जाने के दौरान सीटी बजाकर उन्हें अपमानित करने का प्रयास किया जाता है। इससे परिवार की सुरक्षा और सम्मान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पीड़ित परिवार का यह भी आरोप है कि थाने के कुछ जिम्मेदार लोगों द्वारा दबंगों को संरक्षण दिया जा रहा है, जिसके कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में क्षेत्र में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस किसी बड़े विवाद या खूनी संघर्ष का इंतजार कर रही है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय कब तक मिल पाता है।