-
☰
उत्तर प्रदेश: हिंदू मॉडल इंटर कॉलेज में “भारत की विदेश नीति” विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित
- Photo by : SOCIAL MEDIA
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: आज दिनांक 30 मार्च 2026 दिन सोमवार को हिंदू मॉडल इंटर कॉलेज मुरादाबाद में निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। निबंध का विषय था भारत की विदेश नीति चुनौतियां और अवसर। विद्यालय के लगभग 50 छात्र/छात्रा
विस्तार
उत्तर प्रदेश: आज दिनांक 30 मार्च 2026 दिन सोमवार को हिंदू मॉडल इंटर कॉलेज मुरादाबाद में निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। निबंध का विषय था भारत की विदेश नीति चुनौतियां और अवसर। विद्यालय के लगभग 50 छात्र/छात्राओं ने बढ़चढकर प्रतिभाग किया। सभी विद्यार्थियों ने भारतीय विदेश नीति पर अपने अपने बहुत सुंदर विचार लिखे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एडवोकेट छत्रपाल सिंह ने विद्यार्थियों को बताया कि भारत की विदेश नीति 'राष्ट्रीय हित' को सर्वोपरि रखने, गुटनिरपेक्षता, और 'वसुधैव कुटुंबकम' (विश्व एक परिवार है) के सिद्धांतों पर आधारित है। यह नीति स्वतंत्र निर्णय लेने, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, पड़ोसी देशों के साथ सहयोग (Neighborhood First), और वैश्विक मंच पर भारत को एक 'विशाल शक्ति' (Major Power) के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य नन्हें सिंह ने कहा कि भारत की विदेश नीति के मुख्य निर्धारक तत्व ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत, भौगोलिक स्थिति, राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक हित, और अंतरराष्ट्रीय माहौल हैं। यह नीति 'वसुधैव कुटुंबकम' (विश्व एक परिवार है), शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, गुटनिरपेक्षता और पंचशील के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रहित की रक्षा करना है। कार्यक्रम का सफल संचालन NCC प्रभारी जगदीश चंद्र ने किया और अपने संबोधन में विस्तारपूर्वक बताया कि भारत की विदेश नीति का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना, साम्राज्यवाद का विरोध करना, रंगभेद नीति के खिलाफ खड़ा होना, अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण और राजनीतिक समाधान का प्रचार करना, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना, गुटनिरपेक्ष और गैर-प्रतिबद्ध रहना और तीसरी दुनिया की एकता और एकजुटता को बनाए रखना है। भारत की विदेश नीति के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में राष्ट्रीय हितों की रक्षा, विश्व शांति की प्राप्ति, निरस्त्रीकरण और अफ्रीकी-एशियाई देशों की स्वतंत्रता शामिल हैं। इन उद्देश्यों को पंचशील, राष्ट्रीय राष्ट्रीय नीति और अन्य मार्गदर्शक सिद्धांतों के माध्यम से प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। मीडिया प्रभारी विशाल वर्मा ने भारत की विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र का मूल हित उसकी क्षेत्रीय अखंडता और विदेशी आक्रमण से राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा है। भारत ने लंबे समय बाद विदेशी शासन से कठिन परिश्रमपूर्वक स्वतंत्रता प्राप्त की थी। इसलिए, विदेश नीति की स्वतंत्रता पर उचित बल देना उसके लिए स्वाभाविक था । भारत में विश्व का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है, जिसमें लगभग 2 करोड़ अनिवासी भारतीय और भारतीय मूल के व्यक्ति शामिल हैं, जो विश्वभर में फैले हुए हैं। इसलिए, प्रमुख उद्देश्यों में से एक है उन्हें शामिल करना और विदेशों में उनकी उपस्थिति से अधिकतम लाभ प्राप्त करना, साथ ही साथ उनके हितों की यथासंभव रक्षा करना। निबंध प्रतियोगिता में अल्फीजा प्रथम, कनक प्रधान द्वितीय तथा जयदीप तृतीय स्थान पर रहे। विजेता विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह एवं मेडल पहनाकर सम्मानित किया गया और शेष सभी विद्यार्थियों को भी मेडल पहनाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के पश्चात सभी विद्यार्थियों को मिष्ठान वितरित किया गया। कार्यक्रम में समरपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह, डॉ बिजेंद्र सिंह, अभिषेक गुप्ता, कुशाग्र राज, राजीव सिंह, अजय कुमार, आकाश सक्सेना, मंजू सिंह, गीता यादव, अनुराधा शर्मा, प्रियांशी, मीना रस्तोगी, उपासना गुप्ता, ज्योति अग्रवाल, मीनाक्षी ठाकुर, ईशा प्रजापति, सोनम, अज़रा सिद्दीकी, मनीषा, संजना बाजपेई, प्रियंका शर्मा, मुस्कान, फर्जीन आलम, दीपिका शुक्ला, रागिनी सक्सेना,राजीव गिहार, उमेश चंद शर्मा, इमरान, सिमरन, आरती, रुचि चंद्रा, रूपा कश्यप, खुशबू सैनी, यशिका जायसवाल, निर्वेश शंखधर, गुंजन गुप्ता सहित समस्त शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
भारत द्वारा अफ्रीकी-एशियाई एकजुटता को मजबूत करने के प्रयास, अन्य देशों के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों का समर्थन और अंततः गुटनिरपेक्षता की नीति को अपनाने को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। देश की विकास यात्रा को बनाए रखने के लिए, भारत को अपने विदेशी साझेदारों के साथ संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है ताकि मेक इन इंडिया, स्किल्स इंडिया, स्मार्ट सिटीज, अवसंरचना विकास, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत आदि जैसी योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, वित्तीय सहायता और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्राप्त हो सके। अतः यह कहा जा सकता है कि हाल के वर्षों में, भारत की विदेश नीति ने आर्थिक कूटनीति को राजनीतिक कूटनीति के साथ एकीकृत करने का दृष्टिकोण अपनाया है।