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उत्तराखंड: UKD की क्षेत्रीय क्रांति रैली में उमड़ा जनसैलाब, पहाड़ से सरकार चलाने का संकल्प 

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उत्तराखंड  Published by: Likhit Pant , Date: 21/02/2026 02:03:36 pm Share:
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संक्षेप

उत्तराखंड: उत्तराखंड की शांत वादियों में अब बदलाव का 'रणघोष' सुनाई दे रहा है। पिछले 26 वर्षों से राज्य के दमन और अपनी भाषा-संस्कृति की उपेक्षा से आहत जनता अब सड़कों पर उतर आई है। युवा नेता आशीष नेगी

विस्तार

उत्तराखंड: उत्तराखंड की शांत वादियों में अब बदलाव का 'रणघोष' सुनाई दे रहा है। पिछले 26 वर्षों से राज्य के दमन और अपनी भाषा-संस्कृति की उपेक्षा से आहत जनता अब सड़कों पर उतर आई है। युवा नेता आशीष नेगी के गंगोलीहाट आगमन पर जो जनसैलाब उमड़ा, उसने साफ़ कर दिया है कि पहाड़ का युवा अब जाग चुका है और अपनी क्षेत्रीय पार्टी (UKD) का दामन थामने को तैयार है बाहरी ठेकेदारी और हक की लूट" पर सीधा प्रहार जनसभा के दौरान आशीष नेगी ने उन कड़वे सच को उजागर किया, जिसने हर पहाड़ी के स्वाभिमान को झकझोर दिया है 26 साल का हिसाब: राज्य बनने के इतने वर्षों बाद भी उत्तराखंड की अपनी भाषा को पहचान क्यों नहीं मिली?  ठेकेदारी राज का अंत: "हिसार-हरियाणा के ठेकेदार यहां ठेकेदारी कर रहे हैं और हमारे संसाधनों को लूट रहे हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नौकरियों पर डाका: सरकारी नौकरियों में बाहरी राज्यों के लोगों को प्राथमिकता देने से स्थानीय स्नातक युवा आज दर-दर भटकने को मजबूर है।

 UKD का 'गरम जोश': उत्तराखंड बचाना है, तो अपनों को लाना है इस बार उत्तराखंड की राजनीति में यूकेडी (उत्तराखंड क्रांति दल) एक नई ऊर्जा के साथ उभर रहा है। "जय पहाड़, जय पहाड़ी" का नारा अब केवल एक आवाज़ नहीं, बल्कि उत्तराखंड को बचाने का संकल्प बन चुका है। जनता का मानना है किमूल निवास 1950 और सख्त भू-कानून ही पहाड़ के अस्तित्व की ढाल हैं। दिल्ली से चलने वाली राष्ट्रीय पार्टियां पहाड़ का दर्द नहीं समझ सकतीं, इसलिए अब क्षेत्रीय शक्ति को मजबूत करना अनिवार्य है।"उत्तराखंड बचाना है, तो UKD को लाना है" — यह नारा आज गंगोलीहाट के बच्चे-बच्चे की ज़ुबान पर था। गंगोलीहाट का संदेश: "अब नहीं सहेगा पहाड़!"
आशीष नेगी के भव्य स्वागत ने यह साबित कर दिया है कि जनता अब 'वैकल्पिक राजनीति' के लिए तैयार है। मातृशक्ति और युवाओं ने एक सुर में कहा कि अब अपनी ज़मीन, अपनी नौकरी और अपनी पहचान का सौदा नहीं होने दिया जाएगा।
पहाड़ों से शुरू हुआ यह 'गरम जोश' अब पूरे प्रदेश में फैल रहा है। युवा अब केवल मतदाता नहीं, बल्कि उत्तराखंड के भविष्य के रक्षक बनकर सामने आ रहे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि यह 'पहाड़ी स्वाभिमान' की लहर 2027 के चुनावों में क्या बड़ा उलटफेर करती है।

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