Contact for Advertisement 9650503773


छत्तीसगढ़: मजदूरी के लिए शरीर से समझौता, गन्ना खेतों में महिलाओं की दर्दनाक सच्चाई आई सामने 

- Photo by : social media

छत्तीसगढ़  Published by: Pankaj Singh Koshle , छत्तीसगढ़  Edited By: Kunal, Date: 16/04/2026 11:55:28 am Share:
  • छत्तीसगढ़
  • Published by.: Pankaj Singh Koshle ,
  • Edited By.: Kunal,
  • Date:
  • 16/04/2026 11:55:28 am
Share:

संक्षेप

छत्तीसगढ़: जब मजदूरी के लिए गर्भाशय हटाना पड़ जाए, महाराष्ट्र के गन्ना खेतों में काम करने वाली महिलाओं को आज भी ऐसी परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है, जहाँ उन्हें अपना गर्भाशय हिस्टरेक्टॉमी हटवाना पड़ रहा है।

विस्तार

छत्तीसगढ़: जब मजदूरी के लिए गर्भाशय हटाना पड़ जाए, महाराष्ट्र के गन्ना खेतों में काम करने वाली महिलाओं को आज भी ऐसी परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है, जहाँ उन्हें अपना गर्भाशय हिस्टरेक्टॉमी हटवाना पड़ रहा है। लंबी घंटों की मेहनत, बेहद कम मजदूरी करीब ₹300-₹350 रोज और एक दिन भी छुट्टी लेने पर जुर्माना। इन सबके कारण महिलाएं यह सर्जरी करवा रही हैं, ताकि पीरियड या गर्भावस्था के कारण काम न छूटे। यह सिर्फ मेडिकल नहीं, बल्कि गरीबी और शोषण की समस्या है। 

मजदूर महिलाओं को बताया जाता है कि ऑपरेशन से वे “महीने की समस्या” से मुक्त हो जाएंगी और ज्यादा काम कर पाएंगी। कई जगह लड़कियों की कम उम्र में शादी, जल्दी गर्भधारण और बेहद कठिन काम की वजह से उनकी सेहत पहले ही कमजोर होती है। ऊपर से ठेकेदारों का दबाव और छुट्टी पर जुर्माना उन्हें इस कठोर फैसले की ओर धकेल देता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र के बीड जिले में लगभग 36% महिलाओं ने हिस्टरेक्टॉमी करवाई, जबकि राष्ट्रीय औसत सिर्फ 3% है। जो बेहद चौंकाने वाला अंतर है। हजारों महिलाओं, यहाँ तक कि 25 साल से कम उम्र की लड़कियों तक ने यह सर्जरी करवाई है।