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Illegal liquor smuggling: शराब बॉटलिंग प्लांट से बार-बार अवैध शराब हुई बरामद, पुलिस के जवाबी कार्रवाई न करने पर उठे सवाल
- Photo by : NCR SAMACHAR
संक्षेप
झारखंड: रांची के ओरमांझी थाना क्षेत्र के उकरीद स्थित तरंगनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड के शराब बॉटलिंग प्लांट से बार-बार अवैध शराब बरामद होने के बावजूद जवाबी कार्रवाई न होने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
विस्तार
झारखंड: रांची के ओरमांझी थाना क्षेत्र के उकरीद स्थित तरंगनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड के शराब बॉटलिंग प्लांट से बार-बार अवैध शराब बरामद होने के बावजूद जवाबी कार्रवाई न होने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पूर्व राजद एमएलसी सुबोध कुमार राय से जुड़े इस प्लांट को सील किए जाने के बाद वहां से जब्त सबूतों के गायब होने के कारन मामला और संदिग्ध गया है। पहले भी सामने आ चुकी है अवैध शराब की शिकायत तरंगनी लीकर्स प्लांट में अवैध शराब की गतिविधियां पहले भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद हर बार कार्रवाई के बाद कुछ समय बीतने पर प्लांट में गतिविधियां दोबारा शुरू होने की बात सामने आई। इससे उत्पाद विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा हैं की 19 मार्च 2023 को उत्पाद विभाग की टीम ने प्लांट में छापेमारी की थी। जांच के दौरान अवैध शराब से जुड़ी अव्यवस्था सामने आई थीं। आरोप था कि झारखंड में बॉटलिंग के लिए अधिकृत शराब को कथित तौर पर दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा था। मामले में ओरमांझी थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी और उत्पाद विभाग ने लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा भी की थी। कुछ समय बंद रहने के बाद प्लांट में दोबारा काम शुरू हो गया। 30 जून 2026 को फिर हुई छापेमारी 30 जून 2026 की रात उत्पाद विभाग ने एक बार फिर प्लांट पर कार्रवाई की। इस दौरान अवैध शराब बरामद होने की बात सामने आई। आरोप था कि झारखंड के लिए अधिकृत लाइसेंस के बावजूद उत्तर प्रदेश और दिल्ली के लिए शराब की बॉटलिंग की जा रही थी। मामले में एक जुलाई को प्राथमिकी दर्ज हुई और प्लांट संचालक सुबोध कुमार राय समेत तीन लोगों को जेल भेजा गया। इसके बाद प्लांट को सील कर दिया गया। सीलबंद प्लांट की निगरानी में तैनात थी टीम प्लांट को सील करने के बाद उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस और उत्पाद विभाग के कर्मचारियों को दी गई थी। ओरमांझी थाना पुलिस के अलावा उत्पाद विभाग के तीन जवान और एक दारोगा निगरानी में लगाए गए थे। प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सील खोलकर आगे की जांच कराने की तैयारी भी की थी। जानकारी के अनुसार 17 अगस्त को जब मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में प्लांट का निरीक्षण किया जाना था, तब मौके पर पहुंची टीम को वहां का ताला पहले से खुला मिला। प्लांट के शटर उखड़े हुए थे और पीछे की दीवार भी क्षतिग्रस्त पाई गई। सबसे गंभीर बात यह रही कि छापेमारी के दौरान जब्त किए गए कई महत्वपूर्ण साक्ष्य वहां मौजूद नहीं थे। सीसीटीवी का डीवीआर भी गायब जांच के दौरान प्लांट से सीसीटीवी का डीवीआर भी गायब मिला। सीलबंद परिसर में इस तरह से ताला टूटना, दीवार क्षतिग्रस्त होना और साक्ष्यों का गायब हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पूरे घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि परिसर में योजनाबद्ध तरीके से छेड़छाड़ की गई हो सकती है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
