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मध्य प्रदेश: Jhantla के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय: 26 फरवरी को लादूलाल जैन की दीक्षा

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मध्य प्रदेश  Published by: Khwaja Hussain , Date: 25/02/2026 03:24:27 pm Share:
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  • 25/02/2026 03:24:27 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: भेरुनाथ की नगरी व विशुद्ध नगर, झांतला के लिए ऐतिहासिक क्षण  अणुव्रत से महाव्रत कि ओर अग्रसर गृह संयमी की भव्य संयम पथ प्रभावना फेरी गोद भराई बिंदोली श्री दिगंबर जैन मंदिर झांतला से निकाली गई। ध

विस्तार

मध्य प्रदेश: भेरुनाथ की नगरी व विशुद्ध नगर, झांतला के लिए ऐतिहासिक क्षण  अणुव्रत से महाव्रत कि ओर अग्रसर गृह संयमी की भव्य संयम पथ प्रभावना फेरी गोद भराई बिंदोली श्री दिगंबर जैन मंदिर झांतला से निकाली गई। धर्म गौरव नगर गौरव एवं वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर ज़ी महामुनिराज के परम भक्त पं. श्री लादुलाल ज़ी जैन ( धनोप्या )की भव्य जैनेश्वरी दीक्षा दिनांक 26 फरवरी 2026,को अतिशय तीर्थ क्षेत्र पद्मप्रभु,जी बाड़ा मे वात्सल्य वारिधि पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री 108 वर्धमान सागरजी महाराज के सानिध्य व आशीर्वाद से संपन्न होने जा रही है। जिसके उपलक्ष्य मे भव्य गोद भराई व बिंदोली,के अंतर्गत झांतला मे भी 24 फरवरी को  श्री जैन की भव्य बिंदोली दिगंबर जैन मंदिर झांतला से प्रारंभ होकर बालाजी मंदिर भेरुजी मंदिर बस स्टैंड नई आबादी होती हुई जैन संत शाला में धर्म सभा के साथ संपन्न हुई। जिसमें क्षेत्र के हजारों लोगों ने भाग लिया। संत शाला में आयोजित धर्म सभा में बोलते हुए सुलग मुनि श्री की दीक्षा ले रहे। 

लादू लाल जैन ने कहा कि दीक्षा व,संत बनने से पहले  अत्यंत कठोर पवित्र और वैराग्य से भरी तपस्या की यह कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं बल्कि एक लंबी तैयारी और आत्मनिरीक्षण का परिणाम होता है। श्री जैन साधु बनने से पहले मुख्य प्रक्रिया मुख्य अवस्था धारण की इस चरण में व्यक्ति सांसारिक सुख सुविधाओं परिवार धन,पद से विरक्त होकर उसके मन में आध्यात्मिक जागृति पैदा होती है। और गुरु का सानिध्य और मार्गदर्शन प्राप्त होता है। जैन धर्म का अध्ययन और व्रत का पालन करना पड़ता है। स्वाध्याय जैन ग्रंथो  और  सूत्रों  आगमों का अध्ययन करना अनुवृत से महावृत का पालन करना 10 लक्षण जीवन में उतरना 30 दिन तक उपवास रखना आज्ञा और अनुमति सांसारिक मोह का त्याग दीक्षा समारोह में मन की पवित्रता वैराग्य आदि प्रक्रियाओं से गुज़रना पड़ता है। जीवन क्षण भंगुर है। अतः जीवन का असली अर्थ 84 लाख योवनियों से विमुक्त,होकर धर्म व भक्ति की राह पर चलकर मोक्ष प्राप्त कर  आत्मा का कल्याण करना होता है।

 जीवन में जाने अनजाने में मैंने मन वचन काया से किसी को दुख पहुंचा है। तो मैं हृदय से क्षमा मांगता हूं। इस धर्म सभा में कल्याणमल जैन रावतभाटा अध्यक्ष समग्र दिगंबर जैन समाज भगवती लाल जैन बोराव अध्यक्ष मेवाड़ प्रांत लाभचंद सिलोरिया चांदमल ठग सुनील हरसोरा रावतभाटा रतनलाल सिलोरिया सिंगोली पारस धानोप्या श्रीमती कमलेश हरसोरा जनपद प्रतिनिधि राजेश शर्मा संजय जैन झांतला आदि ने भी अपने विचार रखकर श्री जैन के जीवन पर विस्तृत से प्रकाश डाला सकल दिगंबर जैन समाज झांतला अध्यक्ष मानक जैन युवा अध्यक्ष पारस सिंटू जैन ने सभी का स्वागत सत्कार किया। कार्यक्रम का सफल संचालन अध्यापक जम्मू कुमार जैन द्वारा किया गया व आभार अभिव्यक्ति संजय जैन सिंटू द्वारा की गई। प्रभावना स्वरूप पूरे नगर में सर्व समाज को मिठाई के पेडे वितरित किए गए। व मेहमानों का स्नेह भोज आयोजित किया गया। सिंगोली से ख्वाजा हुसैन। 
 


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