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मध्य प्रदेश: मुक्तिधाम में दिखेगा जीवन चक्र, जन्म से मृत्यु तक की मूर्तियां होंगी स्थापित

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Yashoda, Date: 25/06/2026 05:46:55 pm Share:
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  • Published by.: Ajay Singh Tomar ,
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: पोरसा जीवन की नश्वरता और कर्मों के महत्व का संदेश देने के उद्देश्य से मुक्तिधाम में एक अनूठी पहल की जा रही है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: पोरसा जीवन की नश्वरता और कर्मों के महत्व का संदेश देने के उद्देश्य से मुक्तिधाम में एक अनूठी पहल की जा रही है। यहां जन्म से लेकर मृत्यु तक के जीवन चक्र को दर्शाने वाली विशेष मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। इन मूर्तियों के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जाएगा कि मनुष्य खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाता है, उसके साथ केवल उसके कर्म ही जाते हैं। मुक्तिधाम सेवा समिति द्वारा समाजसेवी डॉ. अनिल गुप्ता के सहयोग से यह कार्य जनभागीदारी के माध्यम से कराया जा रहा है। मूर्तियों में शैशव अवस्था, युवावस्था, प्रौढ़ावस्था, वृद्धावस्था और अंततः मृत्यु तक की पूरी जीवन यात्रा को दर्शाया जाएगा।

समिति का मानना है कि मुक्तिधाम वह स्थान है, जहां व्यक्ति जीवन की सच्चाई को सबसे करीब से महसूस करता है। अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान मनुष्य कुछ समय के लिए जीवन के वास्तविक अर्थ और कर्मों के महत्व को समझता है, लेकिन बाद में वह फिर सांसारिक दौड़-भाग में उलझ जाता है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है, ताकि यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ सके। इन मूर्तियों का निर्माण ग्वालियर में मूर्ति कलाकार श्याम कुशवाह द्वारा किया जा रहा है। परियोजना की कुल लागत लगभग 7 लाख रुपये बताई गई है। आगामी पूर्णिमा तक इन मूर्तियों को मुक्तिधाम परिसर में स्थापित किए जाने की तैयारी है।

इस पूरी परियोजना का खर्च समाजसेवी अजय कुमार गुप्ता द्वारा वहन किया गया है। बताया गया कि मुक्तिधाम के भ्रमण के दौरान वहां स्थापित अन्य प्रेरणादायक मूर्तियों को देखकर उनके मन में जन्म से मृत्यु तक की जीवन यात्रा दर्शाने वाली मूर्तियां स्थापित करने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने डॉ. अनिल गुप्ता से चर्चा कर इस योजना को मूर्त रूप देने का प्रस्ताव रखा और निर्माण का पूरा भुगतान स्वयं किया। मुक्तिधाम सेवा समिति का कहना है कि यह पहल समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और जीवन के वास्तविक दर्शन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।