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उत्तर प्रदेश: सरकारी जमीन पर हुआ कथित कब्जा, नोटिस के बाद भी कार्रवाई पर उठे सवाल
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: जलालपुर तहसील के भियांव ब्लॉक अंतर्गत मढवरपुर ग्राम सभा के चक अज भुजगी में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का मामला एक बार फिर चर्चा में है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: जलालपुर तहसील के भियांव ब्लॉक अंतर्गत मढवरपुर ग्राम सभा के चक अज भुजगी में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का मामला एक बार फिर चर्चा में है। ग्रामीणों ने गांव के सरकारी तालाब, बंजर भूमि और चकमार्ग पर कथित अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव स्थित तालाब गाटा संख्या 78, बंजर भूमि गाटा संख्या 29 और 33 तथा चकमार्ग संख्या 37 पर कथित रूप से निर्माण किया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 32 बिस्वा क्षेत्रफल वाले तालाब में अब मौके पर लगभग 10 बिस्वा भूमि ही दिखाई देती है। उनका आरोप है कि चकमार्ग और बंजर भूमि पर भी निर्माण होने से रास्ता प्रभावित हुआ है। इस मामले में ग्रामीणों की ओर से राज बहादुर तिवारी पर कथित कब्जे के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आना बाकी है। ग्रामीणों का कहना है कि मामले की जांच के लिए जलालपुर प्रशासन की ओर से टीम गठित की गई थी और तीन बार जांच कराई गई। ग्रामीणों के दावे के मुताबिक, जांच के बाद जून 2025 में बेदखली का नोटिस भी जारी किया गया था। इसके बावजूद सरकारी भूमि को अब तक कब्जामुक्त नहीं कराए जाने को लेकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कब्जे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कुछ लोगों को धमकियां भी दी जा रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि हो चुकी है और बेदखली का नोटिस भी जारी किया गया है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सरकारी तालाब को कब्जामुक्त कराने, बंजर भूमि को सुरक्षित करने और चकमार्ग को अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग की है। अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर मौके की पैमाइश कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल सवाल यही है कि बेदखली नोटिस के बाद सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई कब तक आगे बढ़ती
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