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उत्तर प्रदेश: प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को कैबिनेट से मिली मंजूरी, 7,395 करोड़ रुपये से मजबूत होंगी 2.55 लाख पंचायतें
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: केंद्र सरकार ने देशभर में ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शासन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: केंद्र सरकार ने देशभर में ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शासन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (पीएमवीजीएसवाई) के लिए 7,395.55 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। योजना के लिए निर्धारित कुल राशि में केंद्र सरकार 4,869.48 करोड़ रुपये और राज्य सरकारें 2,526.07 करोड़ रुपये का योगदान देंगी। इसके माध्यम से देशभर की 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना से लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और अन्य संबंधित हितधारकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इस योजना के तहत पंचायतों को स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विकास की योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी। पंचायतें अपने क्षेत्र की समस्याओं, विकास में आने वाली बाधाओं और उपलब्ध संसाधनों की पहचान कर सकेंगी। इसके आधार पर गांवों की प्राथमिकताओं के अनुरूप योजनाएं बनाई जा सकेंगी। योजना का एक प्रमुख उद्देश्य ग्राम पंचायतों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना भी है। इसके तहत पंचायतों को वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदानों का बेहतर उपयोग करने और अपने स्वयं के राजस्व के स्रोत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण स्तर पर विकास कार्यों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। योजना के तहत हर साल 2.55 लाख ग्राम पंचायत विकास योजनाएं (जीपीडीपी) ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर तैयार करने का लक्ष्य है। इन योजनाओं में गांवों की जरूरतों, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि पंचायतों को विकास का केंद्र बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में सुशासन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
