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उत्तर प्रदेश: तीन बार पैमाइश के बाद भी सरकारी जमीन से कब्जा नहीं हटा, प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: जलालपुर तहसील क्षेत्र के भियांव ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा मढ़वरपुर, चक अज भुजगी में सरकारी भूमि पर कथित कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में तालाब गाटा संख्या 78, बंजर भूमि गाटा संख्या 29 व 33 तथा चकमार्ग संख्या 37 पर कथित रूप से मकान बनाकर कब्जा किया गया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: जलालपुर तहसील क्षेत्र के भियांव ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा मढ़वरपुर, चक अज भुजगी में सरकारी भूमि पर कथित कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में तालाब गाटा संख्या 78, बंजर भूमि गाटा संख्या 29 व 33 तथा चकमार्ग संख्या 37 पर कथित रूप से मकान बनाकर कब्जा किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। मामला सोशल मीडिया और खबरों के माध्यम से भी सामने आ चुका है। इसके बावजूद लंबे समय से कथित कब्जे को हटाने की कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। तीन बार हुई पैमाइश, फिर भी कार्रवाई का इंतजार ग्रामीणों के मुताबिक तहसील प्रशासन जलालपुर द्वारा तीन बार टीम गठित कर पैमाइश कराई जा चुकी है। ग्रामीणों का दावा है कि पैमाइश के दौरान सरकारी भूमि और चकमार्ग पर कब्जे की स्थिति सामने आई, लेकिन इसके बाद भी बेदखली अथवा कब्जा हटाने की ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकारी भूमि पर कब्जे की पुष्टि प्रशासनिक जांच में हो चुकी है, तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? चकमार्ग पर कब्जे से ग्रामीण परेशान ग्रामीणों का आरोप है कि चकमार्ग संख्या 37 पर मकान बनाकर कथित रूप से कब्जा कर लिया गया है, जिससे रास्ते का उपयोग प्रभावित हो रहा है। लोगों का कहना है कि यदि चकमार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तो ग्रामीणों को आवागमन की बड़ी राहत मिल सकती है। क्या गरीब और प्रभावशाली के लिए अलग-अलग है कानून? ग्रामीणों में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि यही कब्जा किसी गरीब व्यक्ति द्वारा किया गया होता तो क्या प्रशासन इतनी लंबी प्रक्रिया अपनाता? लोगों का आरोप है कि गरीबों के मामलों में कार्रवाई तेजी से होती है, जबकि प्रभावशाली लोगों के कथित कब्जे के मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई धीमी दिखाई देती है। हालांकि किसी भी प्रकार के लेन-देन या भ्रष्टाचार का आरोप अभी प्रमाणित नहीं है। ग्रामीणों की ओर से लगाए जा रहे इन आरोपों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। मुख्यमंत्री के बुलडोजर अभियान के बीच स्थानीय प्रशासन पर सवाल उत्तर प्रदेश में सरकारी भूमि और अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार की सख्त नीति की चर्चा लगातार होती रही है। ऐसे में अंबेडकर नगर के इस मामले में ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकारी भूमि और चकमार्ग पर कथित कब्जे की शिकायत लंबे समय से अधिकारियों के संज्ञान में है और कई बार पैमाइश भी हो चुकी है, तो आखिर कार्रवाई कब होगी? ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यदि कब्जा अवैध पाया जाता है तो नियमानुसार सरकारी भूमि और चकमार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और जलालपुर तहसील प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है, या फिर सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का यह मामला फाइलों और पैमाइश तक ही सीमित रह जाएगा?
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