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उत्तराखंड: श्रमिक दिवस पर श्रद्धांजलि व गोष्ठी, मजदूर एकता और अधिकारों पर दिया गया जोर
 

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उत्तराखंड  Published by: Harish Upadhyay , उत्तराखंड  Edited By: Kunal, Date: 02/05/2026 04:58:16 pm Share:
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  • Published by.: Harish Upadhyay ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 02/05/2026 04:58:16 pm
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संक्षेप

उत्तराखंड: अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर भेल मजदूर कल्याण परिषद , इंटक  सेक्टर-3 कार्यालय  पर शहीद श्रमिकों की याद में "श्रद्वाजंलि कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठी" का आयोजन किया गया जिसमें भेल के सैंकड़ों श्रमिकों द्वारा शहीद श्रमिकों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धाजंलि दी गई।

विस्तार

उत्तराखंड: अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर भेल मजदूर कल्याण परिषद , इंटक  सेक्टर-3 कार्यालय  पर शहीद श्रमिकों की याद में "श्रद्वाजंलि कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठी" का आयोजन किया गया जिसमें भेल के सैंकड़ों श्रमिकों द्वारा शहीद श्रमिकों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धाजंलि दी गई। उसके पश्चात विचार गोष्ठी हुई जिसकी अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष  मुकुलराज द्वारा की गई एवं संचालन वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशवनी चौहान द्वारा किया गया। सभा का संबोधन करते हुए इंटक के राष्ट्रीय सचिव एवं संगठन के महामंत्री राजबीर सिंह द्वारा "अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस" की शुरआत एवं इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया कि कार्यस्थल पर कार्य का समय 8 घंटे किया जाना मजदूर आंदोलन में एक बड़ी क्रांतिकारी एक घटना रही है। कल्पना कीजिये कि पूर्व में जब बहुत ही असुरक्षित ओर कष्टदायक परिस्थितियों में मजदूरों से 14 से 16 घंटे तक कार्य करवाया जाता था तो उनकी स्थिति कितनी दयनीय रही होगी।  1886 में अमेरिका में मजदूर यूनियनें कार्य का समय 8 घंटे नियमित कराने हेतु हड़ताल पर थी। 4 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो की "हे" मार्केट में हड़ताली मजदूर भाइयों पर पुलिस ने गोलियां चला दी जिससे 7 मजदूर साथी शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा । कुछ समय पश्चात अमेरिका में कार्य के लिए 8 घंटे का समय निश्चित कर दिया गया। 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन पेरिस में 4 मई को शिकागो में मारे गए निर्दोष मजदूरों की याद में 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया गया। भारत में इसकी शुरुआत 1 मई 1923 को मद्रास में हुई थी। जिस कारण से इसे मद्रास दिवस भी कहा जाता था । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने कानून बनाकर एक कार्य दिवस में 8 घंटे का समय कार्य हेतु नियमित कर दिया। 

साथियों अगर उस समय हमारे मजदूर भाई एकता नहीं दिखाते तो हो सकता है कि आज की परिस्थितियां ऐसी ना होती इसलिए उन मजदूर भाइयों को नमन करते हुए उस घटना से प्रेरणा लें कि एकता में ही शक्ति होती है। मजदूर संगठित होकर ही अपनी दशा सुधार सकते हैं और अपनी दिशा तय कर सकते हैं तथा वर्तमान परिस्थितियों में यह बात और भी ज्यादा आवयश्क हो जाती है। इसलिए हम सभी को संगठित हो कर ही अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा। ततपश्चात संगठन के उपाध्यक्ष प्रशान्त दीप गुप्ता ने सम्बोधन करते हुए कहा कि श्रमिक वर्ग को पुनः एकजुट होकर अपने छीनते हुए अधिकारों, बढ़ते हुए पूंजीवाद के खिलाफ, निजीकरण, सार्वजनिक उपक्रमों के किये जा रहे विनिवेशीकरण एवं निजीकरण , बढ़ती हुई संविदा प्रणाली के खिलाफ एक जुट होकर लड़ना होगा साथ ही कहा अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस लाखों करोड़ो मजदूरो के त्याग,निष्ठा, समर्पण ओर एकता का प्रतीक है जो इस बात का सूचक है कि किसी भी समाज या देश के निर्माण की कल्पना हम श्रमिको के अमूल्य योगदान के बिना नही की जा सकती है।

श्रमिक दिवस वह दिन है जिस दिन का हम अभिनंदन करते है वन्दन करते है प्रत्येक उस कर्मशील व्यक्ति के अमूल्य श्रम का जोकि वो करता है अपने परिवार, अपने समाज और अपने राष्ट्र के विकास के लिए विचार गोष्ठी में प्रशान्त दीप गुप्ता , गौरव ओझा , रविंद्र चौहान,  राकेश चौहान , रजनीश कुमार ,  अमित चौहान , आशुतोष चौहान , संजय शर्मा ,  प्रदीप चौहान , कपिल राणा , इम्तियाज ,  मनोज यादव ,  संदीप चौहान , रितेश गौड़ , रिशु चौहान , अम्बरीश प्रजापति ,  सुनील चौहान , तेजवीर चौहान , अनंगपाल , अशोक शर्मा,  सुबोध कुमार , जसविंदर सिंह , शेखर , विकास राजपूत , ललित सैनी , सुशील नेगी , रवियादव , शानू शर्मा , मनोज धीमान , ओम कृष्ण निगम , कुर्बान अहमद , मन्दीप सिंह आदि उपस्थित रहे।