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बिहार: गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी सांसद पप्पू यादव की तबीयत, IGIMS से PMCH शिफ्ट; आज कोर्ट में पेशी

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बिहार  Published by: Tarun Kumar , Date: 09/02/2026 02:05:21 pm Share:
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  • 09/02/2026 02:05:21 pm
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संक्षेप

बिहार: पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। बीती रात उनके पटना आवास पर चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर रात में सबसे पहले IGIMS और फि

विस्तार

बिहार: पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। बीती रात उनके पटना आवास पर चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर रात में सबसे पहले IGIMS और फिर आज सुबह PMCH ले गई। सांसद ने गिरफ्तारी के समय पुलिस अधिकारियों के सिविल ड्रेस में होने और अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए कड़ा विरोध जताया था। सोशल मीडिया पर उनके निजी सचिव ने आरोप लगाया है कि सांसद को रात भर स्ट्रेचर पर रखा गया और उन्हें उचित इलाज नहीं दिया जा रहा। पुलिस अब उन्हें अदालत में पेश करने की तैयारी कर रही है, जहां उनकी जमानत पर फैसला होगा।

IGIMS से PMCH शिफ्ट पप्पू यादव के आधिकारिक फेसबुक पेज से दावा किया गया कि उन्हें रात भर IGIMS में बेड तक मुहैया नहीं कराया गया। उनके सचिव ने कहा, ‘रात भर IGIMS में स्ट्रेचर पर रखने के बाद पटना पुलिस अभी माननीय सांसद श्री पप्पू यादव जी को अभी PMCH Hospital ले जा रही है। नीट बेटी की लड़ाई लड़ने के लिए उनके साथ सत्ता और प्रशासन के लोग ऐसा साजिशन कर रहे हैं और उन्हें मारने की साजिश रच चुके हैं। पुलिस ने दबाई कानूनी नोटिसें’ सांसद के अधिवक्ता शिवनंदन भारती ने पुलिसिया कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि 1995 के इस केस में पप्पू यादव पहले ही जमानत ले चुके थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बेल टूटने के बाद पुलिस ने जानबूझकर नोटिसों को दबाया और बिना धारा 82 की प्रक्रिया पूरी किए सीधे धारा 83 के तहत गिरफ्तारी की। उनके अनुसार, सीधे कुर्की और गिरफ्तारी के लिए पहुंचना कानूनी रूप से चौंकाने वाला कदम है।

आज कोर्ट में पेशी, फिर जेल या बेल? माना जा रहा है कि आज सांसद को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पप्पू यादव की लीगल टीम जमानत याचिका दायर करने की तैयारी में है। अगर अदालत उनकी याचिका स्वीकार करती है, तो उन्हें रिहाई मिल सकती है, अन्यथा उन्हें जेल जाना होगा। हालांकि, उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें जेल के बजाय अस्पताल के कैदी वार्ड में रखने का विकल्प भी खुला है।


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