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गुजरात: कलमथा ग्राम सभा में जॉब कार्ड से लेकर मिट्टी खनन तक के मुद्दों पर गरमाया माहौल
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संक्षेप
गुजरात: कलमथा, तहसील गंदेवी, जिला नवसारी (गुजरात)कलमथा ग्राम सभा में जॉब कार्ड से लेकर मिट्टी खनन तक के मुद्दों पर माहौल गरमाया कलमथा ग्राम सभा में पंचायत प्रशासन पर कई सवाल उठे कलमथा गांव में आयोजित ग्राम सभा में ग्राम पंचायत के प्रशासन एवं विकास कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए।
विस्तार
गुजरात: कलमथा, तहसील गंदेवी, जिला नवसारी (गुजरात)कलमथा ग्राम सभा में जॉब कार्ड से लेकर मिट्टी खनन तक के मुद्दों पर माहौल गरमाया कलमथा ग्राम सभा में पंचायत प्रशासन पर कई सवाल उठे कलमथा गांव में आयोजित ग्राम सभा में ग्राम पंचायत के प्रशासन एवं विकास कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। ग्रामजनों के साथ-साथ रूपेश पटेल ने भी विभिन्न विषयों पर जवाब मांगे। रूपेश पटेल ने मनरेगा (जॉब कार्ड) धारकों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने तथा काम करने के बावजूद कुछ लाभार्थियों के खातों में मजदूरी जमा नहीं होने के मुद्दे को उठाया। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित रोजगार दिवसों की तुलना में वर्षभर में केवल 20 से 25 दिन ही रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। ग्रामजनों ने पंचायत की स्वनिधि (सेल्फ फंड) के संबंध में जानकारी मांगी तथा उपलब्ध राशि एवं उसके व्यय का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। रूपेश पटेल ने गांव में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कुल कितने कैमरे कार्यरत हैं, उनकी निगरानी कौन करता है तथा आवश्यकता पड़ने पर क्या कैमरों की फुटेज उपलब्ध कराई जाती है। ग्रामजनों ने गांव में सरकारी वृक्षों की कटाई की घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की। लोगों ने आश्चर्य जताया कि सरपंच को सरकारी पेड़ काटे जाने की जानकारी नहीं थी और इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा। रूपेश पटेल ने आगे आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग के बोर्ड का उपयोग कर अवैध खनन एवं मिट्टी बिक्री की गतिविधियां संचालित किए जाने की चर्चाएं हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
इसके अतिरिक्त पत्रकार राजूभाई ने वर्षों से मकान बनाकर रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से हाउस टैक्स एवं अन्य करों का भुगतान करने के बावजूद कई क्षेत्रों में आज भी पक्की सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का अभाव है। साथ ही वर्षा जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से मानसून के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामजनों ने यह सवाल भी उठाया कि पंचायत के कार्यों के संबंध में प्रश्न पूछने या लिखित प्रस्तुति देने वाले लोगों को काम नहीं देने जैसी कोई परंपरा या भेदभावपूर्ण व्यवस्था तो नहीं अपनाई जा रही है। इस विषय पर भी स्पष्ट जवाब मांगा गया। ग्रामजनों ने मांग की है कि ग्राम सभा में उठाए गए सभी मुद्दों की निष्पक्ष जांच की जाए, आवश्यक जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा गांव के हित में उचित कदम उठाए जाएं।
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