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मध्य प्रदेश: आदिवासी अंचल में कलेक्टर का जनसंपर्क अभियान बना मिसाल, शिविर में ऑन-द-स्पॉट समाधान से जीता ग्रामीणों का दिल
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिले के थांदला विकासखंड के ग्राम उदयपुरिया में आयोजित संतृप्ति शिविर ने ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था की एक नई मिसाल पेश की है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिले के थांदला विकासखंड के ग्राम उदयपुरिया में आयोजित संतृप्ति शिविर ने ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था की एक नई मिसाल पेश की है। धरती आबा योजना अंतर्गत संचालित जन भागीदारी सबसे दूर, सबसे पहले अभियान के तहत आयोजित इस शिविर में जिला प्रशासन की सक्रियता और कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट की पहल ने ग्रामीणों के बीच गहरी सकारात्मक छाप छोड़ी। इस मौके पर कलेक्टर ने स्वयं ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, उनकी समस्याओं को सुना और कई मामलों का मौके पर ही निराकरण भी किया। कलेक्टर ने कहा कि शासन-प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं है, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसी लक्ष्य के तहत जिले में गांव-गांव संतृप्ति शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र हितग्राही सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए। उन्होंने यह भी बताया कि आदि सेवा केंद्रों के माध्यम से प्राप्त सभी आवेदनों का त्वरित और पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। ग्रामवासियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कलेक्टर ने कहा कि ग्रामीणों ने अपने गांव को स्वच्छ, व्यवस्थित और आदर्श बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने निर्देश दिया कि आगामी भ्रमण तक प्रत्येक पात्र नागरिक के पास आयुष्मान कार्ड होना चाहिए और गांव की सड़क, पेयजल तथा अन्य मूलभूत आवश्यकताओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि राशन वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता, कम तौल या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कलेक्टर ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद किया और उन्हें लखपति दीदी योजना” के तहत स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिलाएं बचत, छोटे व्यवसाय और स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में उन्होंने बताया कि शिविर में चिन्हित मरीजों का बेहतर अस्पतालों में उपचार सुनिश्चित किया जाएगा तथा आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध है। शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। कृषि विभाग ने ई-विकास प्रणाली के उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों पर प्रकाश डाला। बीईओ थांदला ने जन भागीदारी सबसे दूर, सबसे पहले अभियान के उद्देश्यों की जानकारी दी। वहीं विशेषज्ञ मुकेश भूरिया ने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने बीपी, डायबिटीज और टीबी जैसी बीमारियों के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया और नियमित जांच की सलाह दी। इस अवसर पर हितलाभ वितरण भी किया गया, जिसमें सामाजिक न्याय विभाग द्वारा यूडीआईडी कार्ड और दिव्यांग पेंशन स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। स्वास्थ्य विभाग ने 70 आयुष्मान कार्ड बनाए और पात्र नागरिकों को वितरित किए। राजस्व विभाग द्वारा भूमि संबंधी दस्तावेज जैसे खाता-खसरा की प्रतियां प्रदान की गईं। वहीं लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत भी स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। एमआरएलएम के तहत महिलाओं को शिक्षा से जोड़ने हेतु स्लेट वितरित की गई। कई ग्रामीण समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया गया। सड़क निर्माण से जुड़ी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। दिव्यांग महिला के ई-केवाईसी में आ रही समस्या को दूर करने के लिए विशेष व्यवस्था के आदेश दिए गए। राशन वितरण में अनियमितता की शिकायत पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि और स्वास्थ्य संबंधी कई मामलों में भी त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए गए। इस पूरे शिविर ने यह स्पष्ट किया कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव है। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला कदम बताया।
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