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राजस्थान: वाणी जैन की श्रद्धालुओं से धर्म लाभ लेने की करी अपील, माताजी के सान्निध्य में पहुंचने का दिया संदेश
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संक्षेप
राजस्थान: जयपुर में युवा शतरंज खिलाड़ी वाणी जैन ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से परम पूज्य गणिनी आर्यिका 105 श्री विभाश्री माताजी के दर्शन एवं प्रवचनों का लाभ लेने की अपील की है।
विस्तार
राजस्थान: जयपुर में युवा शतरंज खिलाड़ी वाणी जैन ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से परम पूज्य गणिनी आर्यिका 105 श्री विभाश्री माताजी के दर्शन एवं प्रवचनों का लाभ लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इन दिनों माताजी ससंघ श्री श्याम नगर, वशिष्ठ मार्ग स्थित दिगंबर जैन मंदिर, जयपुर में विराजमान हैं। यह अवसर केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। वाणी जैन ने कहा कि आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में आध्यात्मिक मार्गदर्शन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में संतों का सान्निध्य व्यक्ति को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि गणिनी आर्यिका श्री विभाश्री माताजी के प्रेरणादायी प्रवचन संयम, सदाचार, संस्कार, नैतिक मूल्यों और आत्मकल्याण का संदेश देते हैं, जो हर आयु वर्ग के लोगों के लिए प्रेरणादायक हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों से आग्रह किया कि वे आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें। वाणी जैन ने कहा कि यदि युवा पीढ़ी संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाएगी, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और एक मजबूत, नैतिक तथा जिम्मेदार पीढ़ी का निर्माण होगा। वाणी जैन ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर माताजी के पावन दर्शन करें और प्रतिदिन आयोजित होने वाले प्रवचनों का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर बार-बार नहीं मिलते और संतों का सान्निध्य जीवन को नई दिशा देने का कार्य करता है। उनके विचारों से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि व्यक्ति अपने जीवन में अच्छे संस्कारों और नैतिक मूल्यों को भी अपनाने के लिए प्रेरित होता है। उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम, भाईचारा, अहिंसा और सद्भावना को बढ़ावा देने में धार्मिक प्रवचनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को समय निकालकर धर्म से जुड़ना चाहिए और अपने परिवार की नई पीढ़ी को भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराना चाहिए। अंत में वाणी जैन ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में मंदिर पहुंचकर गणिनी आर्यिका 105 श्री विभाश्री माताजी के दर्शन एवं प्रवचनों का लाभ लेने तथा धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि माताजी का सान्निध्य प्रत्येक श्रद्धालु के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मिक शांति और नई प्रेरणा का संचार करेगा।
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