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उत्तर प्रदेश: फर्जी मीडिया कर्मी बनकर ₹10 हजार मांगने का आरोप, CCTV के आधार पर जांच शुरू
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: अगर कोई आपके घर आए। खुद को पत्रकार बताए, लेकिन पहचान पत्र न दिखाए। फिर खबर रोकने के नाम पर पैसों की मांग करे, तो क्या वह पत्रकार है या ब्लैकमेलर? मथुरा से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने दो लोगों पर फर्जी मीडिया कर्मी बनकर घर पहुंचने और कथित रूप से 10 हजार रुपये की मांग करने का आरोप लगाया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: अगर कोई आपके घर आए। खुद को पत्रकार बताए, लेकिन पहचान पत्र न दिखाए। फिर खबर रोकने के नाम पर पैसों की मांग करे, तो क्या वह पत्रकार है या ब्लैकमेलर? मथुरा से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने दो लोगों पर फर्जी मीडिया कर्मी बनकर घर पहुंचने और कथित रूप से 10 हजार रुपये की मांग करने का आरोप लगाया है। मथुरा में फर्जी मीडिया कर्मी बनकर कथित वसूली करने का एक मामला सामने आया है। एक महिला ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि दो लोग, जिनमें एक पुरुष और एक महिला शामिल थे, उनके घर पहुंचे और स्वयं को मीडिया कर्मी बताया। शिकायत के अनुसार, जब महिला ने दोनों से उनका मीडिया पहचान पत्र दिखाने के लिए कहा, तो वे कोई वैध पहचान पत्र नहीं दिखा सके। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्हें सुनील चौधरी ने भेजा है और महिला के पति से जुड़े एक मुकदमे की खबर प्रकाशित या प्रसारित की जाएगी। महिला का आरोप है कि दोनों व्यक्तियों ने कहा कि यदि वह यह खबर नहीं चलवाना चाहती हैं तो उन्हें 10 हजार रुपये देने होंगे। शिकायत के अनुसार, उनसे यह भी कहा गया कि "फैसला आपके हाथ में है। महिला ने उन्हें बताया कि संबंधित मुकदमे की जांच फिलहाल क्राइम ब्रांच, मथुरा कर रही है। इसके बाद जब उन्होंने पुलिस बुलाने की बात कही, तो शिकायत के अनुसार दोनों व्यक्ति वहां से भाग गए।
महिला का कहना है कि पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। उन्होंने पुलिस से आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है। इस घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि पत्रकारिता की आड़ में आम लोगों को डराने और कथित रूप से धन उगाही करने की कोशिश करने वाले ऐसे लोगों पर कब तक कार्रवाई होगी? क्योंकि ऐसे मामलों से वास्तविक पत्रकारों की छवि भी प्रभावित होती है।
फिलहाल यह सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल कथित वसूली का नहीं, बल्कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करती है। यदि आपके साथ भी इस तरह के लोगों ने मीडिया या किसी सरकारी विभाग का नाम लेकर पैसे मांगने या दबाव बनाने की कोशिश की है, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
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