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उत्तर प्रदेश: दादी को कांवर पर बैठाकर हरियाणा की ओर निकले शिवभक्त, आस्था और सेवा की अनोखी मिसाल

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उत्तर प्रदेश  Published by: Praveen Kumar (UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 01/08/2026 05:54:07 pm Share:
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  • Published by.: Praveen Kumar (UP) ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
  • Date:
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: सावन माह की कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था, सेवा और समर्पण की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। हरिद्वार से जल लेकर हरियाणा के लिए निकले एक शिवभक्त ने अपनी

विस्तार

उत्तर प्रदेश: सावन माह की कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था, सेवा और समर्पण की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। हरिद्वार से जल लेकर हरियाणा के लिए निकले एक शिवभक्त ने अपनी बुजुर्ग दादी को कांवर के एक ओर सुरक्षित बैठाकर और दूसरी ओर गंगाजल रखकर यात्रा शुरू की है। श्रद्धालु अपने साथियों के साथ पैदल यात्रा करते हुए हरियाणा पहुंचेंगे, जहां 11 अगस्त को भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। जानकारी के अनुसार, शिवभक्तों का यह जत्था 2 जून को हरिद्वार से रवाना हुआ था। लंबी और कठिन पैदल यात्रा के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बना हुआ है। यात्रा के दौरान वे जगह-जगह विश्राम करते हुए धार्मिक आस्था और सेवा का संदेश भी दे रहे हैं। इस अनोखी कांवर यात्रा में सबसे अधिक लोगों का ध्यान उस दृश्य ने आकर्षित किया, जिसमें एक युवक ने अपनी बुजुर्ग दादी को कांवर के एक हिस्से में बैठाया है, जबकि दूसरे हिस्से में पवित्र गंगाजल रखा गया है। श्रद्धालु का कहना है कि भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ बुजुर्गों की सेवा भी सबसे बड़ा धर्म है। इसी भावना के साथ वह अपनी दादी को यात्रा में शामिल कर रहा है, ताकि वे भी इस धार्मिक यात्रा का पुण्य प्राप्त कर सकें।

रास्ते में जहां-जहां यह कांवर यात्रा पहुंच रही है, वहां लोग इस अनोखी पहल की सराहना कर रहे हैं। श्रद्धालु और स्थानीय लोग इसे आस्था के साथ परिवार के प्रति समर्पण और सम्मान का प्रतीक बता रहे हैं। यात्रा के दौरान साथी कांवड़िये भी एक-दूसरे की मदद करते हुए पूरे मार्ग में अनुशासन और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। 11 अगस्त को हरियाणा पहुंचने के बाद यह शिवभक्त अपने साथियों के साथ स्थानीय शिव मंदिर में गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। कांवड़ यात्रा के इस प्रेरणादायक दृश्य ने यह संदेश दिया है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसमें माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा का भाव भी शामिल होता है। यही कारण है कि इस अनोखी यात्रा की चर्चा पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच हो रही है।