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बिहार: बिजली सुधार से खेतों में लौटी हरियाली, किसानों को मिली नई उम्मीद

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बिहार:  Published by: Sanjay Kumar Verma , बिहार:  Edited By: Kunal, Date: 25/04/2026 05:07:20 pm Share:
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  • Published by.: Sanjay Kumar Verma ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 25/04/2026 05:07:20 pm
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संक्षेप

बिहार: हाल के वर्षों में बिहार के साथ-साथ प्रखंड क्षेत्र में बिजली व्यवस्था बेहतर हुई है।बिजली कि अच्छी उपलब्धता के कारण प्रखंड के खेतो में प्रत्येक वर्ष हरियाली में इजाफा हो रहा है।ज्ञात हो कि वारिसलीगंज में तीन दश

विस्तार

बिहार: हाल के वर्षों में बिहार के साथ-साथ प्रखंड क्षेत्र में बिजली व्यवस्था बेहतर हुई है।बिजली कि अच्छी उपलब्धता के कारण प्रखंड के खेतो में प्रत्येक वर्ष हरियाली में इजाफा हो रहा है।ज्ञात हो कि वारिसलीगंज में तीन दशक पहले तक जिले का एकमात्र उद्योग चीनी मिल चालू था, जिससे क्षेत्र के खेतों में गन्ना के साथ-साथ अन्य प्रकार की साग-सब्जी और मूंग उड़द की खेती बड़े पैमाने पर की जाती थी। वर्ष 1993 में चीनी मिल बंद होने के साथ-साथ सरकार के लचर रवैया के कारण बिजली की उपलब्धता भी कम होती गई। फलस्वरूप क्षेत्र में धान-गेहूं के अलावा उपजाए जाने वाले वैकल्पिक फसल की बुवाई कम हो गई थी। लेकिन, एक बार फिर बिजली प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने और सरकारी प्रोत्साहन मिलने के बाद क्षेत्र के खेतों में भीषण गर्म के दिनों में भी हरियाली छाई रह रही है। चीनी मिल बंद हो जाने के कारण क्षेत्र के युवाओं का रोजगार छिन गया और बिजली कम मिलने के कारण महंगी डीजल पंप सेट के सहारे कृषि कार्य करना महंगा का सौदा हो गया था, जिससे कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हुई थी। 

यही कारण रहा की क्षेत्र के युवा खेती किसानी छोड़ रोजगार के लिए दूसरे प्रदेश में पलायन कर गए। जो घर पर रह गए वे धान गेहूं खेती कर रहे थे। जिसमें किसानों को सुखाड़ और दहाड़ जैसी प्राकृतिक आपदा झेलनी पड़ती थी, जिससे फसल उपजाने में लगाए गए पूंजी के अनुपात में मुनाफा काम हो रहा था। वही परंपरागत कृषि कार्य के अलावे भीषण गर्म के समय खेतों में उपजाने वाला मूंग, उड़द और सब्जी जो चीनी मिल चालू रहने की स्थिति में पर्याप्त मात्रा में उपजाई जाती थी में कमी आ गई थी। लेकिन अब हाल के वर्षों में बिजली की उपलब्धता बढ़ने के कारण क्षेत्र के किसान पुनः पुराने तरीके से कृषि करना शुरू कर दिया है।यही कारण है कि धान और रवि फसल की कटाई के बाद खाली खेतों में लगने वाली सब्जी,मूंग,उड़द और इस वर्ष तो पर्याप्त मात्रा में मूंगफली की गई है। हालाकि इस वर्ष भीषण गर्म के कारण मूंग उड़द व मूंगफली की फसल बचाना किसानों के लिए चुनौती बनी हुई है। सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए मूंग का बीज नहीं खरीद रहे हैं किसान प्रखंड क्षेत्र में सरकारी लक्ष्य के अनुसार लगभग 800 हेक्टेयर से अधिक खेतों में मूंग उड़द की फसल लगाई जानी है,जिसके लिए सरकार द्वारा 55 क्विंटल मूंग बीज सरकारी दुकान पर उपलब्ध कराई है। लेकिन, सरकारी दुकान पर मिलने वाला मूंग बीज की कीमत बाजार में मिलने वाले मूंग बीज के लगभग बराबर रहने के कारण किसान सरकारी दुकान से मूंग बीज खरीदने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं, जिस कारण मूंग लगाने का समय लगभग समाप्त होने को है और अब तक मात्र एक तिहाई से कम 17 क्विंटल बीज ही सरकारी दुकान से बिक्री की गई है।