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मध्य प्रदेश: थांदला में धूमधाम से निकला ईद मिलादुन्नबी का जुलूस, गूंजा ‘सरकार की आमद मरहबा’
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश की खुशी में बुधवार को थांदला में ईद मिलादुन्नबी का पर्व धार्मिक आस्था, उल्लास और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाया गया।
विस्तार
मध्य प्रदेश: पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश की खुशी में बुधवार को थांदला में ईद मिलादुन्नबी का पर्व धार्मिक आस्था, उल्लास और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाया गया। मुस्लिम समाज की ओर से निकाले गए भव्य जुलूस में बड़ी संख्या में समाजजन, युवा और बच्चे शामिल हुए। जुलूस के दौरान नात-ए-पाक और ‘सरकार की आमद मरहबा’ के नारों से नगर का माहौल खुशनुमा हो गया।पीरसाब गली से शुरू हुआ जुलूस, परंपरागत मार्गों से पहुंचा जामा मस्जिद ईद मिलादुन्नबी का जुलूस पीरसाब गली से शुरू हुआ। यहां से जुलूस जामा मस्जिद, गांधी चौक, भंसाली चौराहा, पीपली चौराहा, आजाद चौक, गवली मोहल्ला और बोरा मोहल्ला होते हुए वापस जामा मस्जिद पहुंचा। पूरे मार्ग में समाजजनों ने अनुशासन और भाईचारे के साथ जुलूस में भाग लिया। जुलूस में शामिल लोगों और बच्चों के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों की ओर से जगह-जगह स्वागत किया गया। फूल बरसाकर इस्तकबाल किया गया तथा बच्चों को चॉकलेट और लोगों को जलपान वितरित किया गया। विधायक वीरसिंह भूरिया ने किया मुस्लिम समाज का स्वागत जुलूस के दौरान कांग्रेस विधायक वीरसिंह सिंह भूरिया ने मुस्लिम समाज के लोगों का स्वागत किया। विधायक द्वारा किए गए इस्तकबाल पर समाजजनों ने उनका आभार व्यक्त किया। इस दौरान नगर में सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे की भावना देखने को मिली। पीपली चौराहे पर राजू धानक की टीम ने किया स्वागत पीपली चौराहे पर समाजसेवी राजू धानक एवं उनकी टीम ने जुलूस में शामिल मुस्लिम समाजजनों का पुष्पों से स्वागत किया। इसके बाद उम्मीद फाउंडेशन की ओर से ठंडे पेयजल की व्यवस्था की गई। जगह-जगह नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जुलूस का स्वागत कर भाईचारे का संदेश दिया। पुलिस-प्रशासन की पुख्ता व्यवस्था, समाज ने जताया आभार ईद मिलादुन्नबी के जुलूस को लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से भी व्यापक व्यवस्थाएं की गईं। जुलूस के दौरान यातायात, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक एवं नगर परिषद का अमला सक्रिय रहा। व्यवस्थाओं में तहसीलदार, एसडीएम भास्कर गाचले, नायब तहसीलदार, कस्बा पटवारी सहित नगर परिषद के कर्मचारियों का भरपूर सहयोग रहा। पुलिस प्रशासन की टीम भी जुलूस के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रही। मुस्लिम समाज ने शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित आयोजन में सहयोग के लिए पुलिस प्रशासन, एसडीएम भास्कर गाचले, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कस्बा पटवारी तथा नगर परिषद के समस्त कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। बाल मुबारक की जियारत, फातेहा के बाद मुल्क के लिए मांगी दुआ जुलूस के जामा मस्जिद पहुंचने के बाद धार्मिक कार्यक्रम हुआ। मुस्लिम समाज की ओर से खुशी के मौके पर मिठाई वितरित की गई। इसके बाद हजरत मोहम्मद साहब से मनसूब बाल मुबारक की जियारत करवाई गई। सीरत-ए-मुस्तफा: रहमत, इंसाफ और इंसानियत का पैगाम हजरत मोहम्मद साहब का जीवन पूरी दुनिया के लिए इंसानियत, रहम, सब्र, सच्चाई, न्याय और भाईचारे की मिसाल माना जाता है। इस्लामी परंपरा के अनुसार आपका जन्म मक्का मुकर्रमा में हुआ। बचपन से ही आपकी पहचान सच्चाई और ईमानदारी के लिए बनी और लोग आपको ‘अल-अमीन’ यानी भरोसेमंद के नाम से पुकारते थे। लगभग 40 वर्ष की आयु में हिरा की गुफा में आपको पहली वह्यी प्राप्त हुई। इसके बाद आपने लोगों को एकेश्वरवाद, सच्चाई, नेक आचरण और इंसानियत का संदेश देना शुरू किया। करीब 23 वर्षों तक आपने लोगों को अल्लाह की इबादत, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद, पड़ोसियों के अधिकार, महिलाओं के सम्मान, अनाथों की देखभाल और इंसाफ की शिक्षा दी। मक्का से मदीना की हिजरत के बाद आपने ऐसा समाज स्थापित करने की दिशा में कार्य किया, जिसमें अलग-अलग समुदायों के लोगों के अधिकार और आपसी जिम्मेदारियां निर्धारित हों। आपकी शिक्षाओं में माफी, दया, पड़ोसी के साथ अच्छा व्यवहार और जरूरतमंद की मदद को विशेष महत्व दिया गया। ईद मिलादुन्नबी का संदेश—मोहब्बत, अमन और भाईचारा ईद मिलादुन्नबी केवल खुशी मनाने का अवसर नहीं, बल्कि हजरत मोहम्मद साहब की सीरत और शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का संदेश भी देता है। सच्चाई, इंसाफ, जरूरतमंद की मदद, पड़ोसी के अधिकारों का सम्मान और समाज में प्रेम एवं भाईचारा कायम रखना पैगंबर साहब की शिक्षाओं के प्रमुख संदेश हैं। थांदला में आयोजित जुलूस में भी इन संदेशों की झलक दिखाई दी। मुस्लिम समाज के जुलूस का विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की ओर से किए गए स्वागत ने नगर की आपसी सद्भाव और सामाजिक भाईचारे की मिसाल पेश की।
जनाब मौलाना इस्माइल बरकाती ने फातेहा पढ़ी और देश में अमन-चैन, भाईचारे, खुशहाली और मुल्क की तरक्की के लिए विशेष दुआ मांगी।
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