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मध्य प्रदेश: कम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ी, सरकार से जल प्रबंधन की मांग
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: मानसून में बारिश का असमान वितरण और कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब सबसे बड़ा सवाल आगामी रबी फसल के लिए सिंचाई के पानी का है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: मानसून में बारिश का असमान वितरण और कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब सबसे बड़ा सवाल आगामी रबी फसल के लिए सिंचाई के पानी का है। जिला कांग्रेस कमेटी नीमच के उपाध्यक्ष गोविंद सिंह साण्डा ने मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार किसानों की इस गंभीर चिंता को लेकर अभी तक ठोस कार्ययोजना जनता के सामने नहीं रख पाई है। साण्डा ने कहा कि किसान आज से रबी की तैयारी कर रहा है, लेकिन सरकार के पास यह बताने का जवाब नहीं है कि कम बारिश की स्थिति में उसके खेत तक पानी कैसे पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि केवल बारिश के कुल आंकड़े जारी करने से जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती। सरकार को नीमच-जावद क्षेत्र के जलाशयों, तालाबों और भूजल की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए तथा रबी सिंचाई के लिए गांव और क्षेत्रवार पानी की स्पष्ट योजना बतानी चाहिए। गोविंद सिंह साण्डा ने सवाल किया अगर सरकार को मानसून की अनिश्चितता दिखाई दे रही थी, तो रबी की फसल के लिए जल प्रबंधन की तैयारी पहले से क्यों नहीं की गई? किसानों को यह कब बताया जाएगा कि उनके खेत में सिंचाई का पानी कहां से आएगा?”
उन्होंने कहा कि रबी की फसल खराब होने के बाद मुआवजे की घोषणा करना समाधान नहीं है। सरकार की जिम्मेदारी है कि फसल खराब होने की नौबत ही न आए। साण्डा ने मध्य प्रदेश सरकार से मांग की कि नीमच-जावद क्षेत्र के लिए तत्काल जलाशयवार जल-स्तर, सिंचाई क्षेत्र, नहर व्यवस्था और रबी के लिए उपलब्ध पानी का सार्वजनिक रोडमैप जारी किया जाए। उन्होंने कहा बारिश प्रकृति के हाथ में है, लेकिन बारिश कम होने पर किसान को संभालना सरकार के हाथ में है। अब किसान को भाषण नहीं, खेत तक पानी चाहिए।
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