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मध्य प्रदेश: नुक्कड़ नाटक के जरिए ग्रामीणों को दिया बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 08/08/2026 03:46:19 pm Share:
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  • Published by.: Ajay Singh Tomar ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
  • Date:
  • 08/08/2026 03:46:19 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: पोरसा क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

विस्तार

मध्य प्रदेश: पोरसा क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को बेटियों के महत्व, उनकी शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रमों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता की। संगीता थापक के मार्गदर्शन में यह जागरूकता कार्यक्रम कौथर कला, कौथर खुर्द, गढ़िया पोरसा, मटियापुरा सहित अन्य गांवों में आयोजित किए गए। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने ग्रामीणों के बीच बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और समाज में मौजूद लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने का संदेश प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया।

बेटी है तो कल है का संदेश

नुक्कड़ नाटक के दौरान बताया गया कि बेटी परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर है। ‘बेटी है तो कल है’ के संदेश के साथ ग्रामीणों को बताया गया कि आज बेटियां शिक्षा, रोजगार, खेल, विज्ञान, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर देश और समाज का नाम रोशन कर रही हैं। ग्रामीणों से अपील की गई कि बेटियों और बेटों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव न किया जाए। जिस तरह बेटों को शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, उसी तरह बेटियों को भी समान अवसर उपलब्ध कराना परिवार और समाज की जिम्मेदारी है।

शिक्षा से मजबूत होगा बेटियों का भविष्य

कार्यक्रम में बालिकाओं की शिक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। बताया गया कि एक बेटी को शिक्षित करने का लाभ केवल उसे ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों को मिलता है। शिक्षित बेटी अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझते हुए परिवार, समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नाटक के जरिए ग्रामीणों को बालिकाओं की पढ़ाई बीच में न रोकने, उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजने तथा उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखने का संदेश दिया गया। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने और बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया।

ग्रामीणों ने लिया जागरूकता का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने यह संदेश भी दिया कि बेटियां अपने संस्कार, शिक्षा और प्रतिभा के माध्यम से परिवार का गौरव बढ़ाती हैं। ग्रामीणों से बेटियों को बोझ समझने वाली मानसिकता को समाप्त करने की अपील की गई। जागरूकता कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों ने बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच रखने और उनकी शिक्षा एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों ने भी ग्रामीणों से अपने आसपास के परिवारों को बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की।महिला एवं बाल विकास विभाग की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करना, बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करना और लैंगिक भेदभाव को कम करना है। कार्यक्रम के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया गया कि बेटी को बचाना ही नहीं, बल्कि उसे पढ़ाकर शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।


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