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उत्तर प्रदेश: संतकबीरनगर में तकनीकी सहायकों ने खोला मोर्चा, CM को ज्ञापन भेज दी आंदोलन की चेतावनी
- Photo by : SOCIAL MEDIA
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में फील्ड स्तर पर जिम्मेदारी निभाने वाले तकनीकी सहायकों के मानदेय को लेकर एक बार फिर आवाज उठी है। तकनीकी सहायकों का कहना है कि
विस्तार
उत्तर प्रदेश: ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में फील्ड स्तर पर जिम्मेदारी निभाने वाले तकनीकी सहायकों के मानदेय को लेकर एक बार फिर आवाज उठी है। तकनीकी सहायकों का कहना है कि पिछले करीब पांच वर्षों से मानदेय में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि इस दौरान महंगाई और आवागमन का खर्च लगातार बढ़ा है। इसी को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर मानदेय बढ़ाने की मांग की गई है। मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। तकनीकी सहायकों का दावा है कि फील्ड में लगातार भ्रमण के कारण उन्हें हर माह पेट्रोल पर करीब छह हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में वर्तमान मानदेय में बढ़ती महंगाई के बीच काम करना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो रहा है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के स्थलीय निरीक्षण, तकनीकी जांच और अन्य फील्ड कार्यों की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद मानदेय में लंबे समय से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि जिले के नौ विकासखंडों में करीब 70 तकनीकी सहायक कार्यरत हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देने के दौरान तकनीकी सहायकों की संख्या अपेक्षाकृत कम नजर आई। इसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यदि मानदेय वृद्धि की मांग सभी तकनीकी सहायकों से जुड़ी है तो ज्ञापन देने के मौके पर बड़ी संख्या में कर्मचारी क्यों नहीं पहुंचे। हालांकि, कम संख्या में पहुंचने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। यह भी संभव है कि सभी तकनीकी सहायकों को कार्यक्रम की जानकारी समय पर न मिली हो या किसी अन्य कारण से वे मौके पर उपस्थित न हो सके हों। इसलिए केवल उपस्थिति के आधार पर सभी तकनीकी सहायकों की राय का आकलन करना उचित नहीं होगा। फिलहाल मानदेय बढ़ाने की मांग और संगठन की ओर से आंदोलन की चेतावनी ने मामले को चर्चा में ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि शासन स्तर से इस मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है और आने वाले दिनों में जिले के अन्य तकनीकी सहायक इस आंदोलन में शामिल होते हैं या नहीं। मानदेय पांच साल से नहीं बढ़ने की मांग अपनी जगह है, लेकिन ज्ञापन के दौरान कम संख्या में कर्मचारियों की मौजूदगी ने एक अलग सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या आने वाले दिनों में यह आवाज व्यापक आंदोलन का रूप लेगी या मामला ज्ञापन तक ही सीमित रहेगा?
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