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बिहार: फर्जी शिक्षक नियोजन का बड़ा मामला, वेतन भुगतान और नियुक्ति पर उठे सवाल

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बिहार  Published by: Dinesh Kumar Gupta , बिहार  Edited By: Kunal, Date: 01/05/2026 11:01:23 am Share:
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  • Published by.: Dinesh Kumar Gupta ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 01/05/2026 11:01:23 am
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संक्षेप

बिहार: नवादा लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, नवादा की सुनवाई के बाद जिले में फर्जी शिक्षक नियोजन से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विस्तार

बिहार: नवादा लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, नवादा की सुनवाई के बाद जिले में फर्जी शिक्षक नियोजन से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 में एक शिक्षक का समंजन/नियोजन किया गया था, लेकिन बाद में 2018 में उसकी नियुक्ति को फर्जी घोषित कर दिया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार संबंधित शिक्षक न तो कभी स्कूल में उपस्थित रहा और न ही उसकी किसी प्रकार की जॉइनिंग या उपस्थिति का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मिला। इसके बावजूद लंबे समय तक वेतन भुगतान किए जाने का भी आरोप सामने आया है। इस पूरे मामले के खुलासे के बाद RTI (सूचना के अधिकार) के माध्यम से कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुए, जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी, नवादा को विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है।

प्रशासनिक स्तर पर यह भी आशंका जताई जा रही है कि यह मामला किसी बड़े रैकेट का हिस्सा हो सकता है, जिसमें फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां की गईं। बिहार में इस तरह के मामलों को लेकर पहले भी कई जांचें सामने आ चुकी हैं, जहां हजारों शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल उठे हैं। सूत्रों के अनुसार, अब इस मामले में आगे की कार्रवाई के तहत FIR दर्ज होने की संभावना है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों की नौकरी समाप्त करने के साथ-साथ उनसे वेतन की वसूली भी की जा सकती है। साथ ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने के मामले में कानूनी कार्रवाई और जेल की सजा का भी प्रावधान है। गौरतलब है कि पटना हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की बड़े पैमाने पर जांच की जा रही है। अब तक लाखों शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा चुका है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की मांग एक बार फिर तेज हो गई है।


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