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GST Refund Scam: 5.50 करोड़ का GST रिफंड घोटाला का हुआ खुलासा, तीन अधिकारी समेत पांच आरोपी गिरफ्तार
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संक्षेप
दिल्ली: दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच ने 5.50 करोड़ रुपये के GST रिफंड घोटाले का खुलासा करते हुए ट्रेड एंड टैक्सेज विभाग के तीन अधिकारियों समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
विस्तार
दिल्ली: दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच ने 5.50 करोड़ रुपये के GST रिफंड घोटाले का खुलासा करते हुए ट्रेड एंड टैक्सेज विभाग के तीन अधिकारियों समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया हैं की नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी कर फर्जी तरीके से GST रिफंड लिया जा रहा था, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा। शिकायत के बाद शुरू हुई जांच जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई ट्रेड एंड टैक्सेज विभाग से मिली शिकायत के आधार पर शुरू की गई। शुरुआती जांच में सामने आया हैं की वित्तीय जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बिना ही कई रिफंड दावों को मंजूरी दे दी गई। जांच में यह सामने आया हैं की फर्जी दस्तावेजों और नकली तस्वीरों का इस्तेमाल कर लगभग 5.50 करोड़ रुपये का गलत रिफंड प्राप्त किया गया। अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोप जांच एजेंसी का कहना हैं की तत्कालीन GST अधिकारी अजीत सिंह पर आवश्यक जांच पूरी किए बिना रिफंड जमा करने का आरोप है। वहीं GST इंस्पेक्टर अटल भारद्वाज पर बिना स्थल निरीक्षण किए झूठी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाया गया है। मामले में लोअर डिवीजन क्लर्क हिमांशु मलिक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इसके अलावा अजय कुमार और आशीष मिश्रा पर घोटाले से जुड़े पैसे को छिपाने और उसके लेनदेन में सहयोग करने का आरोप है। एसीबी ने बताया की इस मामले में पहली बार अदालत के आदेश के बाद अपराध से अर्जित बताई जा रही संपत्ति को अटैच किया गया है। एजेंसी का कहना है की लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की जांच जारी है तथा मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही हैं। GST धोखाधड़ी पर बढ़ी निगरानी विशेषज्ञों के मुताबिक GST व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी कंपनियां बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने और गलत तरीके से रिफंड हासिल करने जैसे मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए GST विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच एजेंसियां और विभिन्न राज्यों की एंटी करप्शन शाखाएं लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है की डिजिटल निगरानी, डेटा एनालिटिक्स और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की गहराई से जांच करने पर ऐसे फर्जी नेटवर्क की पहचान कर उन पर शिकंजा कसा जा रहा है।
