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मध्य प्रदेश: फुटपाथ व्यापारियों ने निगम पर लगाए गंभीर आरोप, अतिक्रमण अभियान में पक्षपात का दावा
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ मुहिम विवादों में घिर गई है। हाथ-ठेला एवं फुटपाथ व्यापारी संघ ने नगर निगम के वाहन चालक योगेश गोडाले उर्फ राज पर अवैध वसूली, पक्षपात और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
विस्तार
मध्य प्रदेश: नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ मुहिम विवादों में घिर गई है। हाथ-ठेला एवं फुटपाथ व्यापारी संघ ने नगर निगम के वाहन चालक योगेश गोडाले उर्फ राज पर अवैध वसूली, पक्षपात और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ ने कलेक्टर और निगमायुक्त को ज्ञापन सौंपकर चालक पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही अतिक्रमण अमले के प्रभारी और नगर निगम के सहायक आयुक्त राघवेंद्र सिंह पालिया की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। बिना सूचना जब्ती और रसूखदारों को छूट संघ का आरोप है कि पक्की दुकान वालों ने अपनी दुकानों के बाहर 10 फीट तक कुर्सियां लगाकर अतिक्रमण कर रखा है, लेकिन रसूखदारों का सामान नहीं हटाया गया। केवल गरीब पथ विक्रेताओं को निशाना बनाया गया जो निगम की कार्रवाई में स्पष्ट रूप से पक्षपात को दर्शाता है। आरोप यह भी है कि रसूखदारों से रुपये की वसूली की जा रही है। संघ ने मांग की है कि टीवीसी की बैठक को तत्काल स्थगित कर पंजीकृत संघों को आमंत्रित किया जाए, बिना सूचना जब्त किया गया सामान वापस हो और उज्जैन व हरसिद्धि चारधाम क्षैत्र में पथ विक्रेताओं को वेंडिंग जोन उपलब्ध कराते हुए शीघ्र यह अधिनियम लागू किया जाए। सहायक आयुक्त की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में
व्यापारी संघ के अनुसार 28 जुलाई 2026 को राम मंदिर से चारधाम मंदिर एवं शेर चौराहा से नरसिंह घाट तक चालक योगेश के नेतृत्व में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। इस दौरान बिना किसी लिखित सूचना या सीजर मेमो के गरीब पथ विक्रेताओं की टेबल, कपड़े और अन्य सामान बलपूर्वक जब्त कर लिया गया।
टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक और अधिनियम का उल्लंघन संघ के महामंत्री संजय चौहान ने बताया कि निगम की यह कार्रवाई पथ विक्रेता अधिनियम 2014 की धारा 20 का स्पष्ट उल्लंघन है। 29 जुलाई 2026 को बुलाई गई टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक में पंजीकृत पथ विक्रेता संघों को आमंत्रित ही नहीं किया गया, जो कि धारा 22 की उपधारा 2 एवं 3 का सीधा उल्लंघन है। जब पथ विक्रेताओं ने चालक योगेश से जब्ती का आदेश मांगा, तो उसने उनके साथ दुर्व्यवहार करते हुए अपशब्दों का प्रयोग किया।
ज्ञापन में नगर निगम के सहायक आयुक्त राघवेंद्र सिंह पालिया पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संघ का कहना है कि जब से उन्होंने नगर निगम में पदभार संभाला है, तब से अब तक अतिक्रमण अमले की चार से अधिक टीमें बनाई जा चुकी हैं और छह से ज्यादा प्रभारी बदले जा चुके हैं। आरोप है कि कोई भी प्रभारी 8 से 15 दिन से ज्यादा टिक नहीं पाता। संघ ने अंदेशा जताया है कि प्रभारियों को इतनी जल्दी-जल्दी बदलने के पीछे अवैध वसूली मुख्य कारण हो सकती है।
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