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Online Child Adoption Scam: साइबर पुलिस ने गिरोह का किया भंडाफोड़, ऑनलाइन बच्चा गोद दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी

- Photo by : NCR SAMACHAR

दिल्ली  Published by: Shubhi Shikha Nayal , दिल्ली  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 06/08/2026 11:34:57 am Share:
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  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
  • Date:
  • 06/08/2026 11:34:57 am
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संक्षेप

राजधानी दिल्ली में पुलिस की साइबर टीम ने ऑनलाइन बच्चा गोद दिलाने का झांसा देकर निसंतान दंपतियों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है।

विस्तार

दिल्ली: राजधानी दिल्ली में पुलिस की साइबर टीम ने ऑनलाइन बच्चा गोद दिलाने का झांसा देकर निसंतान दंपतियों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपी खुद को प्रतिष्ठित चाइल्ड एडॉप्शन संस्थाओं से जुड़ा बताकर लोगों का विश्वास जीतते थे और जैसे ही पीड़ित पूरी रकम जमा कर देते थे तो आरोपी उनसे संपर्क तोड़कर फरार हो जाते थे। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी सचिन अग्रवाल और उसके साथी राकेश कुमार उर्फ डॉ. आर.के. को गिरफ्तार किया है।

इंटरनेट पर तलाश रहे लोगों को बनाते थे निशाना

पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी सचिन अग्रवाल ने कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपना मोबाइल नंबर साझा कर रखा था। जो लोग इंटरनेट पर कानूनी तरीके से बच्चा गोद लेने की जानकारी खोजते थे, वे सीधे उसके संपर्क में आ जाते थे। इसके बाद आरोपी खुद को अधिकृत एजेंसियों से जुड़ा बताकर गोद लेने की पूरी प्रक्रिया कराने का भरोसा देता था।

फर्जी दस्तावेजों से जीतते थे भरोसा

जब किसी पीड़ित को संदेह होता या वह गोद लेने की प्रक्रिया के सबूत मांगता, तब गिरोह का दूसरा सदस्य राकेश कुमार नकली दस्तावेज तैयार करता था। इनमें फर्जी एनजीओ की रसीदें, मनगढ़ंत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और अन्य मेडिकल रिकॉर्ड शामिल होते थे। इन दस्तावेजों के जरिए दंपतियों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि बच्चा जल्द ही जन्म लेने वाला है और गोद लेने की प्रक्रिया पूरी तरह वैध है।

बच्चे के सामान तक खरीदवा लेते थे आरोपी

गिरोह केवल शुरुआती रकम ही नहीं लेता था, बल्कि पीड़ितों को बच्चे के कपड़े और अन्य जरूरी सामान खरीदने की भी सलाह देता था। तय डिलीवरी की तारीख नजदीक आने पर ट्रांसपोर्टेशन और अंतिम कानूनी प्रक्रिया के नाम पर एक और भुगतान कराया जाता था। जैसे ही पूरी रकम उनके खातों में पहुंचती, आरोपी अपने मोबाइल फोन बंद कर देते और संपर्क खत्म कर देते थे।

बुराड़ी की शिकायत से खुला मामला

इस पूरे मामले का खुलासा बुराड़ी निवासी एक महिला की शिकायत के बाद हुआ। डीसीपी राजा बांठिया के अनुसार, नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट साइबर थाना पुलिस की टीम ने जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।

दोनों आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड

मुख्य आरोपी सचिन अग्रवाल बरेली का रहने वाला है और केवल 10वीं तक पढ़ा है। वह कमीशन पर लकड़ी सप्लाई का काम करता था और पहले भी धोखाधड़ी के एक मामले में नामजद रह चुका है। वहीं, उसका साथी 53 वर्षीय राकेश कुमार पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट है। उसके खिलाफ भी पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस दोनों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।