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Fake Anti-Corruption Bureau Officer: नकली ACB अधिकारी हुआ गिरफ्तार, आबकारी अधिकारी से ₹1 लाख और शराब मांगने के आरोप में तीन आरोपी गिरफ्तार

- Photo by : NCR SAMACHAR

छत्तीसगढ़  Published by: Shubhi Shikha Nayal , छत्तीसगढ़  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 28/07/2026 04:13:54 pm Share:
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  • Published by.: Shubhi Shikha Nayal ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
  • Date:
  • 28/07/2026 04:13:54 pm
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संक्षेप

छत्तीसगढ़: अंबिकापुर से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई हैं, जहाँ आरोपियों ने कथित तौर पर फोन पर ज़िला आबकारी अधिकारी से संपर्क किया और खुद को ACB अधिकारी बताया।

विस्तार

छत्तीसगढ़: अंबिकापुर से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई हैं, जहाँ आरोपियों ने कथित तौर पर फोन पर ज़िला आबकारी अधिकारी से संपर्क किया और खुद को ACB अधिकारी बताया। उन्होंने दावा किया कि एक सीनियर इंस्पेक्शन टीम आने वाली है और कहा कि टीम के रहने, खाने और दूसरी सुविधाओं का इंतज़ाम तुरंत किया जाना चाहिए। उन्होंने कथित तौर पर ₹1 लाख और शराब की छह बोतलें मांगीं और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर सरकारी कार्रवाई हो सकती है।

आबकारी अधिकारी को शक हुआ

बताया जा रहा हैं की ज़िला आबकारी अधिकारी लक्ष्मीकांत गायकवाड़ को अनजान नंबर से धमकी भरा कॉल आने पर शक हुआ, जिसके बाद मांग को मानने के बजाय, उन्होंने तुरंत गांधीनगर पुलिस को सूचना दी और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद तेज़ी से जांच शुरू हुई। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कॉल में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर का पता लगाया। जांच में अधिकारी ठाकुरपुर के रहने वाले सौरभ प्रजापति तक पहुँचे। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर माना कि यह योजना दो साथियों के साथ मिलकर बनाई गई थी। जानकारी के अनुसार पुलिस ने उसी रात तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपियों ने मिलकर  बनाई थी धोखाधड़ी की योजना 

जानकारी के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वे शराब की दुकान के पास मिले थे और तय किया था कि वे बिना अपने पैसे खर्च किए शराब हासिल करेंगे। उन्होंने कथित तौर पर ACB अधिकारी बनकर उन पर कैश और शराब देने का दबाव बनाने की योजना बनाई थी। गिरफ्तार लोगों की पहचान 24 वर्षीय सौरभ प्रजापति, 43  वर्षीय राजेश गोस्वामी और 40 वर्षीय रंजीत गुप्ता के तौर पर हुई है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वे पहले भी ऐसी घटनाओं में शामिल रहे हैं। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।