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राजस्थान: 38 वर्षीय निधि जैन ने रचा तप का अनूठा उदाहरण, लगातार तीसरी बार किया दशलक्षण उपवास

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राजस्थान  Published by: Jinesh Kumar Jain , राजस्थान  Edited By: Yashoda, Date: 26/09/2026 02:40:00 pm Share:
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  • Published by.: Jinesh Kumar Jain ,
  • Edited By.: Yashoda,
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  • 26/09/2026 02:40:00 pm
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संक्षेप

राजस्थान: जयपुर वरुण पथ, मानसरोवर स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर से लंबे समय से जुड़े रानोली, सीकर निवासी धार्मिक परिवार की 38 वर्षीय श्रीमती निधि गौरव जैन ने दशलक्षण पर्व के दौरान तीसरी बार दशलक्षण उपवास पूर्ण कर तप, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।

विस्तार

राजस्थान: जयपुर वरुण पथ, मानसरोवर स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर से लंबे समय से जुड़े रानोली, सीकर निवासी धार्मिक परिवार की 38 वर्षीय श्रीमती निधि गौरव जैन ने दशलक्षण पर्व के दौरान तीसरी बार दशलक्षण उपवास पूर्ण कर तप, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। उपवास पूर्ण होने पर परिवारजनों एवं समाजबंधुओं ने भव्य जुलूस निकालकर पुष्पवर्षा के साथ उनका अभिनंदन किया। निधि जैन के पति गौरव जैन ने बताया कि गणिनी आर्यिका 105 श्री विभाश्री माताजी के आशीर्वाद एवं मंगल प्रेरणा से यह कठिन तप साधना पूर्ण हुई। दो छोटे बच्चों नैवेद्य जैन (8 वर्ष) एवं चर्चित जैन (5 वर्ष) की मां निधि जैन ने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ लगातार तीसरी बार दशलक्षण उपवास पूर्ण कर नई पीढ़ी के लिए धर्म, संस्कार और संयम की प्रेरणा प्रस्तुत की।


समिति अध्यक्ष जे.के. जैन एवं मंत्री ज्ञान चंद जैन बिलाला ने बताया कि मंदिर में पर्युषण एवं दशलक्षण पर्व के दौरान अनेक श्रद्धालुओं ने तप, त्याग और उपवास की साधना की। प्रचार संयोजक जिनेश कुमार जैन ने बताया कि तेला करने वाले तपस्वियों में श्रीमती ममता जैन, श्री दीपेश जैन, श्री प्रदीप जैन, श्रीमती अंकिता नरेश शाह, श्रीमती प्राची सूचित जैन, श्रीमती पूर्णिमा राहुल जैन, श्री आशीष जैन मालपुरा, श्री चिरायु बाकलीवाल, श्रीमती पूजा अनूप जैन, श्रीमती अनिता मुकेश बड़जात्या एवं श्रीमती उषा छाबड़ा शामिल हैं। दशलक्षण उपवास करने वालों में श्री जैनेंद्र पाटनी, श्रीमती निधि गौरव जैन, श्री सर्वेश जैन, श्रीमती सुमन पापड़ीवाल, दीदी माताजी संघस्थ, दिल्ली वाले भैया तथा आर्यिका 105 श्री साम्यश्री माताजी शामिल हैं। वहीं 16 दिवसीय तप साधना श्री गिरीश जैन मांग्यावास एवं श्रीमती सुधा ज्ञान बिलाला ने की। 26 सितंबर को प्रातः 8 बजे तपस्वियों का पारणा कराया गया तथा समाज समिति की ओर से उनका सम्मान किया गया।


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