Contact for Advertisement 9650503773


राजस्थान: पंचायत में कथित फर्जी पट्टा मामला गरमाया, ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

- Photo by : social media

राजस्थान  Published by: Bharat Bunkar , राजस्थान  Edited By: Namita Chauhan, Date: 15/05/2026 10:52:33 am Share:
  • राजस्थान
  • Published by.: Bharat Bunkar ,
  • Edited By.: Namita Chauhan,
  • Date:
  • 15/05/2026 10:52:33 am
Share:

संक्षेप

राजस्थान: भीलवाड़ा ग्राम पंचायत चीडखेड़ा (सहाड़ा) में कथित फर्जी पट्टा जारी करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है।

विस्तार

राजस्थान: भीलवाड़ा ग्राम पंचायत चीडखेड़ा (सहाड़ा) में कथित फर्जी पट्टा जारी करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। गांव की निवासी गंगा देवी जाट सहित कई ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पंचायत प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में तत्कालीन प्रशासक, ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच पति पर पद का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से पट्टे जारी करने, रिकॉर्ड में हेराफेरी तथा वित्तीय अनियमितता करने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम बाड़ा स्थित आराजी संख्या 1573 पर गंगा देवी का परिवार पिछले 60 से 70 वर्षों से निवास कर रहा है और वहां मवेशियों का बाड़ा भी बना हुआ है। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने मिलीभगत कर बिना नीलामी प्रक्रिया और बिना सार्वजनिक सूचना के लगभग 18 से 22 पट्टे अपने चहेते लोगों के नाम जारी कर दिए।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत राज नियमों की अनदेखी करते हुए एक विशेष वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1988 में तत्कालीन सरपंच हीरालाल जाट के कार्यकाल में गंगा देवी की सास लेहरी बाई के नाम 800 रुपये की रसीद जारी की गई थी, जिसमें उक्त भूमि पर कब्जा दर्ज बताया गया है। मामले में पंचायत रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पट्टा दस्तावेजों में अलग-अलग तारीखें दर्ज हैं और कई मामलों में वसूली गई राशि का स्पष्ट लेखा-जोखा पंचायत या बैंक रिकॉर्ड में नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि यदि पंचायत खातों और बैंक रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे मामले का खुलासा हो सकता है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पट्टों की रजिस्ट्री हो चुकी है, जबकि मौके पर जमीन पर कब्जा आज भी गंगा देवी परिवार का ही है। साथ ही उन्होंने वर्ष 2020 से 2026 तक पंचायत में हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और स्टॉक रजिस्टर की जांच कराने की भी मांग की है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से जिला परिषद स्तर पर विशेष जांच कमेटी गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।