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राजस्थान: नागौर में प्राकृतिक खेती पर किसानों को दिया गया प्रशिक्षण
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संक्षेप
राजस्थान: नागौर में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), अठियासन के तत्वावधान में नागौर जिले के ढावा ग्राम में प्राकृतिक खेती विषय पर ऑफ-कैंपस प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विस्तार
राजस्थान: नागौर में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), अठियासन के तत्वावधान में नागौर जिले के ढावा ग्राम में प्राकृतिक खेती विषय पर ऑफ-कैंपस प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों, जैविक कृषि पद्धतियों और पशुपालन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. गोपीचंद सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि कृषि और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य बेहतर होता है, उत्पादन लागत में कमी आती है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। साथ ही किसानों को जीवामृत और बीजामृत जैसे जैविक इनपुट तैयार करने और उनके वैज्ञानिक तरीके से उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों को अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन के साथ-साथ टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान पशु वैज्ञानिक बुधाराम चौधरी ने वर्षा ऋतु में पशुओं के रख-रखाव और स्वास्थ्य प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को पशुओं के लिए स्वच्छ वातावरण, संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही मौसम परिवर्तन के दौरान पशुओं को संक्रमण और अन्य बीमारियों से बचाने के लिए आवश्यक सावधानियां अपनाने की सलाह दी। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जीवामृत एवं बीजामृत तैयार करने की व्यावहारिक प्रक्रिया भी समझाई गई, ताकि वे इन तकनीकों का उपयोग अपने खेतों में प्रभावी ढंग से कर सकें। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, पशुपालन और फसल प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिकों से सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया। आयोजकों ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों से जोड़ना, उत्पादन लागत कम करना और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है। किसानों ने भी इस प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए भविष्य में इस तरह के और कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।
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