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उत्तर प्रदेश: मृत्यु प्रमाण पत्र की पत्रावली में फर्जीवाड़े का आरोप, ईओ की कथित फर्जी मुहर और हस्ताक्षर से एसडीएम कार्यालय पहुंची फाइल
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: बरेली में धौराटांडा नगर पंचायत में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया से जुड़ा कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: बरेली में धौराटांडा नगर पंचायत में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया से जुड़ा कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए तैयार की गई पत्रावली में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (ईओ) के फर्जी हस्ताक्षर और मुहर का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद कथित रूप से तैयार की गई यह पत्रावली एसडीएम सदर कार्यालय तक पहुंचा दी गई। मामला सामने आने के बाद नगर पंचायत प्रशासन की ओर से भोजीपुरा थाने में शिकायत दी गई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी है। मामला भोजीपुरा थाना क्षेत्र की धौराटांडा नगर पंचायत के वार्ड नंबर-02 से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक वार्ड निवासी अशोक कुमार पुत्र स्वर्गीय रामदुलारे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पूनम पत्नी महेंद्र पाल की ओर से आवेदन किया गया था। आरोप है कि आवेदन के बाद प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए जो पत्रावली तैयार की गई, उसमें नगर पंचायत के ईओ के हस्ताक्षर और कार्यालय की मुहर का कथित तौर पर फर्जी इस्तेमाल किया गया। शिकायत के अनुसार, तैयार पत्रावली को बाद में एसडीएम सदर कार्यालय में जमा करा दिया गया। मामला सामने आने के बाद अब नगर पंचायत के मूल रिकॉर्ड और एसडीएम कार्यालय में पहुंची पत्रावली का मिलान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि पत्रावली में इस्तेमाल किए गए हस्ताक्षर और मुहर वास्तविक हैं या उनके साथ छेड़छाड़ की गई है। ईओ के हस्ताक्षर और मुहर के इस्तेमाल पर सवाल पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी के नाम और पद का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किए जाने का है। शिकायत में कहा गया है कि पत्रावली पर ईओ के फर्जी हस्ताक्षर किए गए और कार्यालय की मुहर भी लगाई गई। अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित फर्जी हस्ताक्षर किसने किए, मुहर कहां से हासिल की गई और तैयार पत्रावली को एसडीएम सदर कार्यालय तक कौन लेकर पहुंचा।नगर पंचायत के ईओ संदीप चंद्रा के अनुसार, नगर पंचायत में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से संबंधित मामलों के लिए अलग से कोई जांच अधिकारी नियुक्त नहीं है। इसी वजह से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शान ए हैदर को जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, इस मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जांच की जिम्मेदारी किस आदेश के तहत दी गई और जांच की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई। सभासद समेत चार लोगों पर मिलीभगत का आरोप शिकायत में वार्ड नंबर-02 के सभासद राकेश कुमार कश्यप समेत चार लोगों पर कथित मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, पूनम, शिवचरन कश्यप और बुधसेन के साथ मिलकर अशोक कुमार के मृत्यु प्रमाण पत्र से संबंधित कथित कूटरचित पत्रावली तैयार कराने का आरोप है। हालांकि, इन आरोपों की अभी पुलिस जांच में पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस दस्तावेजों की जांच, संबंधित लोगों के बयान और नगर पंचायत तथा एसडीएम सदर कार्यालय के रिकॉर्ड का मिलान करने के बाद ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। भोजीपुरा थाने से एसएसपी कार्यालय भेजी गई रिपोर्ट मामला सामने आने के बाद नगर पंचायत की ओर से भोजीपुरा थाने में शिकायत दी गई। थाना भोजीपुरा के एसआई रंजीत कुमार के मुताबिक, एफआईआर दर्ज कराने के संबंध में प्राप्त शिकायत पर रिपोर्ट तैयार कर एसएसपी अनुराग आर्य को भेजी गई है। अब उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। कथित पत्रावली किसने तैयार की? दस्तावेज कहां से जुटाए गए? ईओ के हस्ताक्षर और मुहर का इस्तेमाल किसने किया? पत्रावली एसडीएम कार्यालय तक कौन लेकर गया और वहां उसे किस स्तर पर स्वीकार किया गया? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद कथित फर्जीवाड़े की पूरी कड़ी सामने आने की उम्मीद है। मूल रिकॉर्ड से खुलेगा कथित फर्जीवाड़े का राज मामले की जांच में नगर पंचायत और एसडीएम सदर कार्यालय की मूल पत्रावलियां अहम साक्ष्य साबित हो सकती हैं। दस्तावेजों का मिलान, हस्ताक्षरों की जांच, मुहर के इस्तेमाल और पत्रावली जमा कराने से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल से यह पता लगाया जा सकता है कि कथित फर्जीवाड़े की शुरुआत कहां से हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।फिलहाल मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मृत्यु प्रमाण पत्र की पत्रावली में वास्तव में फर्जी हस्ताक्षर और मुहर का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। साथ ही जांच के बाद ही यह तय होगा कि इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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