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उत्तर प्रदेश: तेज हवा और बारिश से गिरी गन्ने की फसल, बजाज चीनी मिल ने किया निरीक्षण
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: तेज हवा और बारिश के कारण गिरी गन्ने की फसल का बजाज चीनी मिल रुधौली के इकाई प्रमुख डॉ. जेपी त्रिपाठी ने निरीक्षण किया। उन्होंने गेट एवं गन्ना क्रय केंद्रों से जुड़े महुआ, खजुआ, गौतम करहली,
विस्तार
उत्तर प्रदेश: तेज हवा और बारिश के कारण गिरी गन्ने की फसल का बजाज चीनी मिल रुधौली के इकाई प्रमुख डॉ. जेपी त्रिपाठी ने निरीक्षण किया। उन्होंने गेट एवं गन्ना क्रय केंद्रों से जुड़े महुआ, खजुआ, गौतम करहली, भरवलिया, कसैला पकड़ी, पकड़ी बी, पालने और दौरा पत्ती समेत विभिन्न गांवों का दौरा कर फसल की स्थिति देखी। इस दौरान उन्होंने किसानों से फसल को नुकसान से बचाने के उपायों पर चर्चा की। निरीक्षण के दौरान कुआनो और मनोरमा नदी के बढ़ते जलस्तर से गन्ने की फसल पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी किसानों से जानकारी ली गई। इकाई प्रमुख ने किसानों से कहा कि तेज हवा के कारण गिरी गन्ने की फसल को जल्द से जल्द बांध दें। खेत में पानी भरा है तो उसकी निकासी की व्यवस्था करें, ताकि जलभराव के कारण फसल को और नुकसान न हो। गन्ना गिरने से उत्पादन पर पड़ता है असर डॉ. जेपी त्रिपाठी ने किसानों को बताया कि गन्ने की फसल गिरने से उसके उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। गिरी हुई फसल में जंगली जानवरों से नुकसान की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में किसान समय रहते गन्ने को बांधने और खेत से पानी निकालने पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक क्षेत्रफल में शरदकालीन गन्ने की बुवाई करने की अपील की। बताया कि शरदकालीन गन्ने की बुवाई से बसंतकालीन बुवाई की तुलना में बेहतर उत्पादन प्राप्त होने की संभावना रहती है। इससे सिंचाई की लागत भी कम आती है। साथ ही पेड़ी की तौल पर्ची मिलने से किसान समय से गेहूं की बुवाई कर सकते हैं। शरदकालीन गन्ने में जंगली जानवरों से नुकसान और रोग-किट के प्रकोप की समस्या भी अपेक्षाकृत कम रहती है। समय से बीज आरक्षित कराने की सलाह सीनियर गन्ना अधिकारी बाल सिंधु गगन पांडेय ने किसानों से शरदकालीन गन्ने की बुवाई के लिए समय से बीज आरक्षित कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान बीज आरक्षित कराने के लिए संबंधित सुपरवाइजर से संपर्क करें, ताकि उन्हें समय से गन्ना बीज उपलब्ध कराया जा सके और अधिक क्षेत्रफल में शरदकालीन गन्ने की बुवाई कराई जा सके। उन्होंने बताया कि फील्ड सुपरवाइजर गांव-गांव जाकर किसानों को शरदकालीन गन्ने की बुवाई के लिए जागरूक कर रहे हैं। इकाई प्रमुख के निर्देश पर टीम गठित कर कुआनो और मनोरमा नदी के बढ़ते जलस्तर की प्रतिदिन निगरानी की जा रही है। जलस्तर की स्थिति की रिपोर्ट चीनी मिल को उपलब्ध कराई जा रही है। जलस्तर घटने के बाद होगा नुकसान का आकलन गन्ना अधिकारियों के अनुसार नदी का जलस्तर घटने के बाद ही जलभराव से फसल को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सकेगा। फिलहाल टीमों की ओर से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। इस दौरान गन्ना अधिकारी एसबी शुक्ल समेत क्षेत्रीय किसान मौजूद रहे।
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