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उत्तराखंड: गंगोलीहाट में वनाग्नि काल 2026 को लेकर रणनीतिक कार्ययोजना तैयार, पंचायत-वन विभाग में समन्वय पर जोर

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उत्तराखंड  Published by: Likhit Pant , Date: 10/02/2026 03:06:14 pm Share:
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संक्षेप

उत्तराखंड: वनों को आग की विभीषिका से बचाने और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ आज विकासखण्ड कार्यालय सभागार, गंगोलीहाट में एक उच्चस्तरीय वनाग्नि सुरक्षा गोष्ठी संपन्न हुई। ब्लॉक प्रमुख  विनोद कुमार

विस्तार

उत्तराखंड: वनों को आग की विभीषिका से बचाने और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ आज विकासखण्ड कार्यालय सभागार, गंगोलीहाट में एक उच्चस्तरीय वनाग्नि सुरक्षा गोष्ठी संपन्न हुई। ब्लॉक प्रमुख  विनोद कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में आगामी 'वनाग्नि काल 2026' के दौरान वनों को सुरक्षित रखने के लिए 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर चर्चा की गई। पंचायतों का सुदृढ़ीकरण और जन-भागीदारी
बैठक को संबोधित करते हुए ब्लॉक प्रमुख ने कहा कि वनाग्नि केवल वन विभाग की समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनौती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ग्राम पंचायत और वन पंचायत स्तर पर स्थानीय लोग सक्रिय नहीं होंगे, तब तक वनों को बचाना कठिन है। बैठक में विशेष रूप से पंचायतों के सुदृढ़ीकरण और उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया।

विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन वन विभाग के अधिकारियों ने आधुनिक तकनीकों और पारंपरिक तरीकों के मेल से आग पर काबू पाने के गुर सिखाए। खण्ड विकास अधिकारी  प्रदीप बिष्ट ने विभागों के आपसी समन्वय (Convergence) पर बल दिया, ताकि आग लगने की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई की जा सके। इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों, वन कर्मियों और जनप्रतिनिधियों ने एकजुटता दिखाई प्रमुख अधिकारी: हेम पाठक (ए.डी.ओ. पंचायत), अमित भट्ट (बी.ओ.),  पीयूष सिंह (जे.ई. पंचायत)। वन विभाग टीम: वन दरोगा जगत सिंह, देवेन्द्र सिंह एवं शैलेन्द्र बम। जनप्रतिनिधि: जजौली, कोठरा, कुन्तोला और सुरखाल के ग्राम प्रधान।वन पंचायत नेतृत्व: कोठरा, सिमलकोट, रणकोट और लाली के सरपंच।  रितिका भट्ट, हरीश जोशी, दिनेश राम, कु. लक्ष्मी नुप्याली और सामाजिक कार्यकर्ता  जगदीश प्रसाद। हमारा लक्ष्य केवल आग बुझाना नहीं, बल्कि आग लगने की स्थिति ही पैदा न होने देना है। इसके लिए हर ग्रामीण को 'वन प्रहरी' की भूमिका निभानी होगी।
 

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